जीडीए के पास करोड़ों की संपत्ति, नहीं मिल रहे खरीदार


गाजियाबाद ब्यूरो। कोयल एन्क्लेव हो, इंद्रप्रस्थ योजना या फिर इंदिरापुरम। यहां खाली कमर्शल प्लॉट और फ्लैट के खरीदार नहीं मिलने से करोड़ों की प्रॉपर्टी धूल फांक रही है। लाख कोशिश के बावजूद जीडीए इनकी बिक्री नहीं कर पा रहा है। जीडीए की प्रॉपर्टी में सबसे खस्ताहाल फ्लैट हैं। रखरखाव के अभाव में यह खराब हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वैशाली सेक्टर-4 स्थित अलकनंदा और मंदाकनी टावर है। बिक्री न होने के कारण ज्यादातर फ्लैट जर्जर हो चुके हैं। यहां रहने वाले लोग जर्जर हो चुकी बिल्डिंग के रखरखाव के लिए जीडीए के साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। टीएचए के लगभग हर इलाके में जीडीए की कोई न कोई प्रॉपर्टी खाली पड़ी है। जीडीए की संपत्तियों में केवल फ्लैट या आवासीय प्लॉट ही खाली नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में दुकानें और व्यावसायिक प्लॉट भी खाली हैं। जीडीए ने अपनी खाली संपत्तियों की जो सूची बनाई है, उसमें यूपी बॉर्डर पर 30 से अधिक दुकानों के प्लॉट हैं, जो खाली पड़े हैं। इनकी बिक्री न होना जीडीए के लिए सिरदर्द बन चुका है। फेडरेशन ऑफ एओए के संस्थापक आलोक कुमार ने बताया कि जीडीए की ज्यादातर प्रॉपर्टी (विशेषकर फ्लैट) या तो जर्जर हो चुके हैं या शहर से दूर हैं, इसलिए वहां खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि जो भूखंड खाली हैं उन पर अतिक्रमण हो गया है। जिस पर अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। 
कहां कितनी संपत्ति है खाली
कोयल एन्क्लेव- 62 ग्रुप हाउसिंग, व्यावसायिक, प्राइमरी और हाईस्कूल भूखंड खाली पड़े हैं।
इंद्रप्रस्थ योजना-57 व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय और ग्रुप हाउसिंग योजनाएं खाली हैं।
कौशांबी-13 फ्लैट व 20 से अधिक मिनी एचईजी नीलगिरी, हिमगिरी, सतपुड़ा और कामदगिरि में संपत्तियां खाली हैं।
इंदिरापुरम योजना- 90 से अधिक आवासीय भूखंड, दुकानों , पेट्रोल पंप और एलआईजी फ्लैट खाली हैं। यह न्याय खंड-1, शक्ति खंड- 1, ज्ञान खंड-3, शक्ति खंड-4 में खाली हैं।
वैशाली-15 से अधिक आवासीय, व्यावसायिक और दुकानों के भूखंड-फ्लैट खाली हैं।