दिल्‍ली वालों के लिए गुड न्‍यूज! अगले महीने से घर के दरवाजे पर होगी राशन की डिलिवरी


  • तीसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने पर बोले अरविंद केजरीवाल
  • मुख्‍यमंत्री के मुताबिक, कोविड से सिर्फ वित्‍तीय चुनौती नहीं थी
  • पांच साल में डिवेलप हुए हेल्‍थ सिस्‍टम ने कोरोना से बचाया: सीएम
  • 'दिल्‍ली में घर-घर राशन डिलिवरी की शुरुआत मार्च से होगी'
नई दिल्‍ली ब्यूरो। दिल्ली सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला साल चुनौतियों भरा रहा है। 16 फरवरी को शपथ लेने के फौरन बाद ही दिल्ली को सदी की सबसे बड़ी महामारी का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, इस महामारी से सिर्फ वित्तीय ही नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ करने की चुनौती थी। सरकार ने न सिर्फ इस चुनौती का सामना किया, बल्कि इस संकट में भी ऐसे मॉडल पेश किए, जिनमें से कुछ को अमेरिका जैसे देशों ने भी अपनाया। अपनी सरकार का एक वर्ष पूरा होने पर अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस साल दिल्ली महामारी से छुटकारा पा लेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना के प्रचंड रूप का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 11 नवंबर को दिल्ली में एक दिन में 8.5 हजार कोरोना के केस आए। इतने केस आने के बाद भी दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली ध्वस्त नहीं हुई। उस दिन भी सात हजार कोरोना बेड्स खाली रहे, जबकि 6300 केस आने पर न्यू यॉर्क का सिस्टम चरमरा गया था। केजरीवाल ने कहा कि यह सब पिछले पांच साल में हेल्थ सिस्टम में किए गए इन्वेस्ट के कारण ही संभव हो पाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से लड़ाई में दिल्ली के डॉक्टरों ने दुनिया को प्लाज्मा थेरेपी और होम आइसोलेशन का मजबूत हथियार सौंपा। अप्रैल में दिल्ली के आईएलबीएस समेत दिल्ली के अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल शुरू हुए। दुनिया का पहला प्लाजमा बैंक दिल्ली में शुरू किया गया। हजारों लोगों की जान इस थेरेपी से ही बच सकी। जब विकसित देशों के अस्पतालों के बाहर मरीज सड़कों पर पड़े होने जानकारी आ रही थी, उस समय दिल्ली में होम आइसोलेशन का कॉन्सेप्ट शुरू किया गया। होम आइसोलेशन में भी डॉक्टरों की टीम मरीजों से रेगुलर बातचीत करती रही और ऑक्सिमीटर दिया गया। देश-दुनिया भर में इसे फॉलो किया गया।
'मजदूरों, ऑटो- टैक्सी ड्राइवरों को आर्थिक मदद दी'
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के मुश्किल दौर में जब लोगों की नौकरियां जा रही थीं। बिजनेस ठप पड़ गया और फैक्ट्रियां बंद हो गईं। ऐसे कठिन समय में सरकार ने न सिर्फ कर्मचारियों को सैलरी दी, बल्कि लोगों की आर्थिक मदद भी की। दिल्ली के दो करोड़ लोगों में से एक करोड़ को कोरोना काल में हर महीने सूखा राशन दिया। 10 लाख लोगों के लिए हर रोज लंच और डिनर की व्यवस्था की। लॉकडाउन में 1.56 लाख ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के खाते में 5-5 हजार और करीब 44 हजार कंस्ट्रक्शन वर्कर के खाते में 10-10 हजार रुपये भेजे गए।
'कोरोना काल में भी मुफ्त पानी-बिजली योजना बंद नहीं'
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में कुछ महीने तो टैक्स आना बिल्कुल बंद हो गया और लोगों को चिंता हुई कि कहीं मुफ्त पानी-बिजली योजना बंद तो नहीं हो जाएगी, लेकिन बेहतरीन वित्तीय मैनेजमेंट करके हमने सुनिश्चित किया कि लोगों को इन योजनाओं का फायदा मिलता रहे। दिल्ली में कुल 52 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से 38 लाख परिवारों के बिजली के और पानी के 25 लाख में से 14 लाख लोगों के जीरो बिल आए।
'मार्च से घर-घर राशन मिलेगा'
मख्यमंत्री ने कहा कि मार्च में डोर स्टेप डिलिवरी ऑफ राशन योजना शुरू हो जाएगी। अब लोगों को राशन की दुकान पर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर 25 किलो गेहूं और 10 किलो चावल मिलना है, तो 25 किलो की एक पैकिंग में साफ-सुथरा गेहूं या आटा और 10 किलो चावल की एक बोरी बनाकर आपके घर पहुंचा दिया जाएगा। दिल्ली में रहने वाले हर एक नागरिक के लिए हेल्थ कार्ड जारी करने की योजना पर भी तेजी से काम हो रहा है। दिल्ली के झुग्गी वालों को मकान देने की योजना बहुत तेजी से चल रही है।