किसानों को रोकने के लिए बॉर्डर पर घेराबंदी, सड़क पर लगाई गईं कीलें


  • टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा और सख्त
  • बॉर्डर पर जेसीबी के अलावा कई रोलर भी खड़े कर दिए गए हैं
  • किसानों ने कहा- देखकर ऐसा लग रहा है कि हम अपराधी हैं
  • 26 जनवरी को किसानों के आंदोलन ने ले लिया था हिंसक रूप
दिल्ली ब्यूरो। टीकरी बॉर्डर पर दिन बीतने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती जा रही है। पहले यहां 8 लेयर में बैरिकेड्स लगाए गए थे, अब रविवार रात को यहां दिल्ली पुलिस की ओर से व्यवस्था और सख्त हो गई है। टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली की ओर से पहले जेसीबी से रोड की खुदाई की गई, फिर यहां सरिए की बने नुकीली कीलें लगा दी गई हैं, ताकि किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली में दाखिल ना हो सकें। दिल्ली पुलिस के इस कदम से किसानों में नाराजगी है। किसान नेताओं का कहना है कि हम देश के किसान हैं, लेकिन सरकार इस तरह से हमारे बीच सुरक्षा घेरा बना रही है, जैसे लगता है कि हम किसान नहीं, बल्कि अपराधी हैं। रविवार और सोमवार को दिल्ली पुलिस की ओर से पहले के मुकाबले सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत कर दिया गया है। बॉर्डर पर जेसीबी के अलावा कई रोलर भी खड़े कर दिए गए हैं। वहीं, टीकरी कलां गांव तक कई दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से इस बॉर्डर पर मोटी दीवार बना दी गई है। दिल्ली की ओर से एमसीडी टोल के पास सड़क खोदकर सरिए से बनी लोहे की कीलें लगवा दी गई हैं। परमानेंट सीमेंट में इसे जाम कर दिया गया है। इसे उखाड़ना इतना आसान नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि दिल्ली पुलिस की ओर से ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि किसान चाहकर भी अब दिल्ली में कूच नहीं कर सकते हैं। इसके लिए बैक टु बैक 8 लेयर में मजबूत बैरिकेड्स लगाए गए हैं। अगर किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली में घुसने की कोशिश करेंगे, तो कीलों की वजह से टायर पंक्चर हो जाएंगे।
आंदोलन की खामियां दूर करने के लिए बैठक
टीकरी बॉर्डर पर रविवार को कोऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक हुई। इसमें टीकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन की कमियां दूर करने पर विस्तार से चर्चा की गई। धरनास्थल पर महिलाओं को शौच के लिए आ रही दिक्कत के लिए शौचालय उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
इंटरनेट सेवा बहाल ना होने पर लगाएंगे वॉकी-टॉकी
किसान नेताओं ने कहा है कि अगर जल्द बॉर्डरों पर इंटरनेट सेवा फिर से बहाल नहीं होती है, तो वे यहां वॉकी-टॉकी लगवाएंगे, ताकि किसान अपनी बातों को आगे पहुंचा सकें। किसानों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन किसान भी अपना वैकल्पिक रास्ता तलाश रहे हैं।
निलंबन के बाद कृषि बिलों के समर्थन में उतरे अधिकारी
डॉ अजय बल्हारा (प्रोग्रम ऑफिसर व ट्रेनिंग इंचार्ज, हरियाणा सरकार) को उनके पद से हटाए जाने के बाद डॉ. अजय किसानों के समर्थन में खुलकर आ गए हैं। निलंबन किए जाने पर उन्होंने कहा की आंदोलनों में नौकरी और प्राणों की कुर्बानियां होती हैं। ये कोई नई बात नहीं है। वह किसानों को लगातार कृषि बिलों को लेकर जागरूक कर रहे हैं। किसान नेता अनूप सिंह चानौत ने कहा की हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण और अच्छे ढंग से चल रहा है। किसान साथियों को कोई भी परेशानी ना हो इसके लिए युवाओं की ड्यूटी लगाई जा रही है। वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है।