दिल्ली में एलजी को और पावरफुल करने के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी, केजरीवाल की बढ़ेगी टेंशन


  • दिल्ली के उपराज्यपाल को अधिक पावरफुल बनाने के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी
  • एलजी व दिल्ली सरकार के बीच टकराव को कम करने के लिए उठाया यह कदम
  • केंद्रीय कैबिनेट के इस कदम से अरविंद केजरीवाल की बढ़ सकती है टेंशन

नई दिल्ली ब्यूरो। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल को और अधिक पावरफुल बनाने के प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी दे दी है। गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी दिल्ली ऐक्ट में कुछ संशोधन कर दिल्ली की निर्वाचित सरकार को तय समय में ही एलजी के पास विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव भेजने का प्रावधान भी है। केंद्र ने संसद के बजट सत्र के दौरान एनसीटी ऑफ दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2021 को भी विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है।
विधानसभा के दायरे से बाहर आने वाले विषयों का भी उल्लेख
सूत्रों के मुताबिक, इनमें उन विषयों का भी उल्लेख है जो विधानसभा के दायरे से बाहर आते हैं। सरकारी सूत्रों के मानें तो ये संशोधन गवर्नेंस को बेहतर करने और एलजी व दिल्ली सरकार के बीच टकराव को कम करने के लिए किए जा रहे हैं। अधिकारों के बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2019 में आए फैसले के बाद इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत महसूस हुई।
संशोधन के मुताबिक ये होंगे बदलाव
बुधवार को कैबिनेट की बैठक में पास किए गए संशोधन के मुताबिक, अब विधायी प्रस्ताव उपराज्यपाल के पास कम से कम 15 दिन पहले और प्रशासनिक प्रस्ताव 7 दिन पहले पहुंचाने होंगे। आपको बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते दिल्ली के उपराज्यपाल को कई अधिकार मिले हुए हैं। हालांकि इसी अधिकार को लेकर केजरीवाल सरकार कई बार अपना विरोध जता चुकी है।
बढ़ेगी अरविंद केजरीवाल की टेंशन
ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र की ओर से उपराज्यपाल को और ज्यादा पावरफुल बनाए जाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की टेंशन और बढ़ सकती है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार का यह दूसरा कार्यकाल चल रहा है, लेकिन दोनों ही कार्यकालों में केंद्र सरकार और उनकी खटपट कभी बंद नहीं हुई। केंद्र का प्रतिनिधित्व करनेवाले उपराज्यपाल के पद पर चाहे कोई भी बैठा हो केजरीवाल सरकार और उस पद पर बैठे शख्स की राय बहुत कम मुद्दों पर एक देखने को मिली। ऐसे में अगर उपराज्यपाल की ताकत और बढ़ती है तो निश्चित तौर पर केजरीवाल के लिए ये टेंशन बढ़ाने वाला साबित होगा।
कोरोना काल में भी दोनों के बीच दिखा था टकराव
केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच अदावत कोरोना संकट के दौरान भी दिखाई दी थी। जब अरविंद केजरीवाल सरकार ने कहा था कि दिल्ली में कोरोना केस बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए फिलहाल दिल्ली सरकार और यहां मौजूद प्राइवेट हॉस्पिटलों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का इलाज होगा। तब इस फैसले पर काफी विवाद हुआ था। फिर अगले ही दिन दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने इसे पलटते हुए कहा था कि दिल्ली में सभी का इलाज होगा जैसा अबतक होता आया है।