कार्ड की डिटेल चुराकर फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर होती है शॉपिंग


प्रेम प्रकाश त्रिपाठी,(गाजियाबाद)। कार्ड की डिटेल को लेकर ठगी करने वाले गैंग की जांच अब बैंकों तक पहुंच गई है। पुलिस ने बैंकों के लिए आउटसोर्स का काम करने वाली एजेंसियों को लेकर जांच शुरू की है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस मामले में कई कंपनियों की भूमिका के बारे में जानकारी मिली है। साथ ही एसटीएफ की ओर से बैंकों को थर्ड पार्टी सिक्यूरिटी से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल किया जा रहा है। इसमें डेटा को शेयर करने के साथ किन सुरक्षा मानकों को अपना गया है ये सवाल भी शामिल हैं। इस बीच हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है कि साइबर ठग डेबिट और क्रेडिट कार्ड से रुपये निकालने के लिए फर्जी शॉपिंग वेबसाइट बनाते हैं। इन्हीं कंपनियों के नाम पर बैंकों में अकाउंट भी खुलवाए जा रहे हैं। गाजियाबाद सीओ साइबर सेल अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि खातों से जुड़े मामलों के संबंध में हमारी टीम पहले ही जांच कर रही है। हाल में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की डिटेल लीक होने की जानकारी बाद एसटीएफ ने 7 लाख क्रेडिट और डेबिट कार्ड की डिटेल के साथ एक गैंग को गिरफ्तार किया है। उनसे मिली जानकारी के बाद पुलिस का एक्शन तेज हुआ है।
वेबसाइट के अकाउंट में जाती है ठगी की रकम
जानकारी के अनुसार, डेटा मिलने के बाद ठग जिन लोगों को कॉल करते हैं, उनसे मिले कार्ड की डिटेल सबसे पहले अपनी फर्जी वेबसाइट पर डालते हैं। कॉल के बाद ठगों के झांसे में आने वाले लोगों से मिलने वाले ओटीपी के बाद फौरन रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं। इसके बाद पीड़ित को लगता है उनके अकाउंट से शॉपिंग हुई है, जबकि यह शॉपिंग साइट वास्तविक रूप में होती ही नहीं है। ठग बाद में अकाउंट से रुपये दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं।
न दुकान न स्टोर फिर भी खुलता है बैंक खाता
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस प्रकार के अकाउंट में ठग फर्जी तरीके से वेबसाइट को तैयार करते हैं। उनके पास न सामान और न ही कोई जगह होती है। इसके बाद भी बैंक में अकाउंट से उसी के नाम पर अप्लाई किया जाता है और अकाउंट भी खुल जाता है। इस प्रकार की कई घटनाएं सामने आने के बाद पुलिस ने बैंकों से इस बारे में जानकारी मांगी है कि क्या इस प्रकार के अकाउंट खोलने के बाद दौरान कोई भौतिक सत्यापन होता है या नहीं।