डीआईजी ने दिया अल्टिमेटम तो आनन-फानन पुलिसवालों ने ढूंढ निकाली दिव्यांग की बेटी


कानपुर ब्यूरो। कानपुर पुलिस ने 27 दिन बाद भीख मांगने वाली दिव्यांग महिला की नाबालिग बेटी को ढूंढ निकाला है। बेटी को देखकर मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। डीआईजी प्रीतिंदर सिंह ने नाबालिग को ढूंढने का अल्टिमेटम दिया था। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए नाबालिग को एक रिश्तेदार के घर से बरामद किया है। दिव्यांग महिला ने भीख मांगकर बेटी को खोजने के लिए सनिगवां चौकी इंचार्ज को 12 हजार रुपए गाड़ी और डीजल के लिए दिए थे। डीआईजी ने बीते मंगलवार को चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह और अरुण कुमार को सस्पेंड कर दिया था। चकेरी थाना क्षेत्र स्थित सनिगवां में रहने वाली दिव्यांग महिला भीख मांगकर गुजर बसर करती थी। दिव्यांग महिला की 15 वर्षीय बेटी बीते 07 जनवरी से लापता थी। बुजुर्ग महिला दो दिनों तक किसी तरह से नाबालिग बेटी की तलाश करती रही। जब उसका कहीं कुछ पता नहीं चला तो उसने चकेरी थाने में बीते 09 जनवरी को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने तहरीर में 5 नामजद और दो अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने दिव्यांग महिला की नाबालिग बेटी को नौबस्ता से ढूंढ निकाला है। नाबालिग एक ठाकुर नाम के रिश्तेदार के यहां रह रही थी। पुलिस रिश्तेदार को अरेस्ट कर पूछताछ कर रही है। दिव्यांग महिला की नाबालिग बेटी को पुलिस 25 दिनों बाद भी नहीं बरामद कर सकी थी। महिला बीते सोमवार को डीआईजी ऑफिस पहुंच गई और उसने रो-रो कर बेटी को सकुशल लाने की गुहार लगाई। दिव्यांग महिला ने डीआईजी को बताया कि सनिगवां चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह ने बेटी को ढूंढने के लिए गाड़ी में डीजल डलवाने के नाम पर 12 हजार रुपए वसूले हैं। महिला की पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। डीआईजी प्रीतिंदर सिंह ने तत्काल दिव्यांग महिला की बेटी को खोजने का आदेश दिया। इसके साथ ही सीओ कैंट निखिल पाठक को इस प्रकरण की जांच सौंपी। प्राथमिक जांच में सनिगवां चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह और जांच अधिकारी अरुण कुमार दोषी पाए गए थे। डीआईजी ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।