आशू बाबा गैंग रेप केस में बड़ा खुलासा, हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से दो सप्ताह में मांगा जवाब


  • आशु बाबा ने लगाया लड़की पर सात करोड़ रुपए मांगने का गंभीर आरोप
  • अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के डीसीपी रामगोपाल नायक पर भी लगाया आरोप 
  • गाज़ियाबाद की लड़की ने सीपीडब्ल्यूडी के दो उच्च अधिकारियों पर भी गैंगरेप का दर्ज कराया था मुकदमा 
राजीव गौड़,(दिल्ली ब्यूरो)। सामूहिक बलाक्तकार और यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे बाबा आशु भाई गुरूजी ने अपने ऊपर लगे दुष्कर्म आरोपों पर सीबीआई  जांच की मांग की है। आशु भाई गुरूजी ने अपनी याचिका में वकील विशाल चौपड़ा ने दावा किया है कि वे एक ऐसे गैंग एक शिकार हुए है जिसका काम ही एक्सटॉरशन करना है। दिल्ली के पश्चिम विहार में आशु बाबा और उनके अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने एक प्रेंस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशाल चोपड़ा ने बताया कि आशु बाबा पर गैंगरेप का आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई है। उन्होंने कहा कि याचिका में शिकायतकर्ता लड़की और उसके साथियों के खिलाफ एक्सटॉर्शन डिमांड की एफआईआर दर्ज कराने और मामले की सी.बी.आई. से जांच कराने की मांग की गई है। गैंगरेप मामले में आशु बाबा ने कई सबूतों के साथ जानकारी दी कि उनपर गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराने वाली गाज़ियाबाद की लड़की ने सीपीडब्ल्यूडी के दो उच्च अधिकारियों पर भी गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया था। बाबा ने आरोप लगाया कि वो लड़की और उसके साथी केवल लोगों को एक्सटॉरशन के लिए फंसाते हैं। अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के उच्चाधिकारी डीसीपी रामगोपाल नायक के खिलाफ भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के उच्च अधिकारी डीसीपी राम गोपाल नायक के खिलाफ भी उनके पास कई सबूत हैं और उस लड़की के एजेंट राम नरेश शर्मा द्वारा आशु भाई गुरुजी केस में सात करोड़ रुपए बतौर एक्सटॉर्शन मनी मांगे जाने के सबूत भी आशु बाबा के पास हैं।
आशु बाबा ने आरोप लगाया कि उन पर केस दर्ज कराने वाली महिला जहां बिचौलिए के जरिए तेरह करोड़ रुपये मांग रही थी, वहीं उनके जले जाने के बाद रकम तो कम हो गई, लेकिन इससे पता चलता है कि जो गिरोह इस तरह की वसूली में जुटा है, उसकी पहुंच जेल तक भी है। वहीं हाई कोर्ट में दायर याचिका पर विगत 16 फरवरी को लंबी बहस के बाद पीठ ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआइ को दे दी जाए? बहस के दौरान कहा गया कि एक महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म आखिर कैसे हो सकता है? जिस महिला ने आशु बाबा, उनके बेटे और सहयोगियों पर सामूहिक दुष्कर्म का केस 3 सितंबर 2018 में हौज खास थाने में दर्ज कराया है, उसी महिला ने 9 माह के बाद जून 2019 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के दो बड़े अधिकारियों पर भी सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज करा रखा है। पुलिस ने उन दोनों अधिकारियों को आज तक गिरफ्तार नहीं किया, क्योंकि महिला के बयान में विरोधाभास है। अधिवक्ता विशाल चोपड़ा ने बताया कि महिला के आरोप के मुताबिक आशु बाबा और अन्य ने 2013 में उसके साथ दुष्कर्म किया, जबकि केस उसने 2019 में दर्ज कराया। छह साल आखिर वह कहां रही? चोपड़ा के मुताबिक महिला एक सिंडिकेट की सदस्य है। क्योंकि बिचौलिया राम नरेश शर्मा क्राइम ब्रांच के तत्कालीन डीसीपी राम गोपाल नाइक के नाम पर 13 करोड़ रुपये मांग रहा था। 
इस संबंध में सभी फोन रिकार्डिंग हाई कोर्ट में जमा कराई गई हैं। रिकार्डिंग में दात्ती महाराज का केस खत्म कराने के लिए भी 13 करोड़ रुपये दिए जाने की बात है और इस संबंध में हाई कोर्ट के आदेश पर जांच हो रही है।  आशु भाई गुरूजी ने आसिफ से आशु बनने की वजह पर भी पत्रकारों से बात की। आशु ने कहा उन्होंने कभी नहीं कहा वे मुस्लिम नहीं है। उनके प्रमाण पत्रों और पहचान पत्रों पर उनका आसिफ खान ही नाम है। आशु उनके बचपन का नाम है जिसके बाद लोग उसे आशु भाई गुरूजी कहने लगे। वे आज भी नमाज पढ़ते है हिन्दू धर्मो का भी मान करते है। आशु भाई गुरूजी दुखी मन से दावा किया की वे उन्हें फ़साने वालों को वे नहीं छोड़ेंगे। उन्हें हर हाल में उनकी करनी की सजा मिलेगी। देश में जिस तरह से हाई प्रोफाइल लोगों को इस तरह से पैसे के लिए फ़साने का धंधा चल रहा है वह बेहद चिंताजनक है और चौकाने वाला है।