फर्जी कॉल सेंटर की महिला निदेशक गिरफ्तार, आतंकी कनेक्शन की जांच शुरू


नोएडा। ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉप के नाम पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की फरार महिला निदेशक आशिया अफजल लोन को कोतवाली फेज-3 पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। आशिया सेक्टर-63 में अपने पति और उसके दोस्त के साथ मिलकर कॉल सेंटर चला रही थी। जहां इंटरनेशनल वॉइस कॉल को निजी सर्वर से लैंड कराकर भारतीय नंबरों पर कॉलिंग कराई जाती थी। इस मामले में फरार निदेशक सोपोर निवासी बासित फारुख डार की तलाश जारी है। वहीं, एटीएस की टीम आरोपियों के आतंकी कनेक्शन की जांच में जुटी हुई है।
पिछले सप्ताह कोतवाली फेज-3 पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में दूरसंचार विभाग की शिकायत पर इस फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था और इसके मास्टरमाइंड करम इलाही को गिरफ्तार किया था। कोतवाली फेज-3 के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र दीखित ने बताया कि सेक्टर-63 के एच ब्लॉक में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की निदेशक श्रीनगर निवासी आशिया अफजल लोन को रविवार को पुलिस ने सेक्टर-73 से गिरफ्तार कर लिया गया। यह फर्जी कॉल सेंटर करम इलाही की पत्नी आशिया के नाम से चल रहा था।
एसएचओ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी आशिया अफजल लोन एमसीए पास है और वह सेक्टर-73 में रह रही थी। इसने जियो और टाटा कंपनी का कनेक्शन ले रखा था। जिसे एक निजी सर्वर से जोड़ दिया था और सॉफ्टवेयर के माध्यम से विदेशी कॉल को अपने सर्वर के माध्यम से भारतीय नंबरों पर लैंड करा रहे थे। इसकी आड़ में इनके पास मोटा पैसा आ रहा था। इससे भारत सरकार को एक तरफ राजस्व की हानि हो रही थी तो दूसरी तरफ इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा भी बना हुआ था। रविवार को गिरफ्तार महिला डायरेक्टर को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं नोएडा कमिश्नरेट पुलिस की टीम जम्मू-कश्मीर जाकर गिरफ्तार करम इलाही, उसकी पत्नी आशिया और फरार बासित के कागजात और पते का सत्यापन कर रही है।
कश्मीर से ही मिली थी शिकायत
जम्मू-कश्मीर से ही इस मामले की शिकायत दूरसंचार विभाग और नोएडा पुलिस से की गई थी। जब निजी सर्वर के माध्यम से विदेशी कॉल को भारतीय नंबरों पर डायवर्ट कर जम्मू कश्मीर के लोगों से बातचीत कराई जा रही थी तब उनके मोबाइल पर जो नंबर डिस्पले हो रहा था उसका एसटीडी कोड नोएडा का था। तब इसकी शिकायत दूरसंचार विभाग से की गई थी। फिर नोएडा पुलिस और एटीएस की टीम ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।
वीओआईपी से होती थी बात
पुलिस जांच में पता चला है कि कॉल सेंटर में वीओआईपी (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) के माध्यम से बात कराई जाती थी। वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकोल टेलीकॉम की तकनीक है जिसमें कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन के साथ किसी भी स्थान पर कॉल की जा सकती है। यह एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदल देता है और लंबी दूरी में कम शुल्क लगता है।