गाजियाबाद नगर निगम ने भवन मालिकों को दी बड़ी राहत, नहीं देना होगा 2020 से पहले का टैक्स


सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। गाजियाबाद नगर निगम ने शहर के करीब एक लाख भवन मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब हाउस टैक्स के दायरे में आने वाले भवन मालिकों को 2020 से पहले का हाउस टैक्स नहीं देना होगा। उन्हें अप्रैल 2020 से टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। इसके साथ ही अब शहर के लोगों को 2020 से पहले का कूड़ा कलेक्शन यूजर चार्ज भी नहीं देना होगा। 
निगम के इस फैसले से शहर में करीब एक लाख भवन मालिकों को हाउस टैक्स में और करीब चार लाख लोगों को कूड़ा कलेक्शन यूजर चार्ज में राहत मिलेगी। बुधवार को नगर निगम सभागार में हुई कार्यकारिणी समिति की बजट बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के बाद हाउस टैक्स आड़ में भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। 
इससे पहले टैक्स विभाग के अधिकारी मकानों पर 10-10 साल पहले से टैक्स निर्धारण कर लाखों के बिल भेज रहे थे। इन बिल को कम करने के नाम पर रिश्वत ली जाती थी। महापौर आशा शर्मा की अध्यक्षता और नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर की मौजूदगी में हुई बैठक में अधिकारियों की ओर से यह सुझाव कार्यकारिणी समिति से मांगा गया कि नए भवनों पर टैक्स का निर्धारण कितने साल पहले से किया जाए। 
नगर आयुक्त ने कहा कि एक साल तय कर दिया जाए, ताकि नए भवनों पर उसी साल से टैक्स निर्धारण किया जा सके। कार्यकारिणी समिति ने रिहाइशी भवनों पर अप्रैल 2020 से और व्यावसायिक भवनों पर अप्रैल 2019 से टैक्स लगाया जाएगा। इससे पहले के वर्षों का टैक्स नए भवनों से नहीं लिया जाएगा। नगर निगम कार्यकारिणी समिति ने इस टैक्स को माफ कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले के इस साल में नगर निगम ने लोगों को बड़ी राहत दी है। हालांकि बीते साल का टैक्स माफ करने के इस निर्णय का फायदा पहले से टैक्स के दायरे में शामिल हो चुके 3.40 लाख भवन मालिकों को नहीं होगा, लेकिन अब टैक्स के दायरे में लाए जाने वाले करीब एक लाख भवन मालिकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
अगले साल से टैक्स के साथ वसूला जाएगा यूजर चार्ज
नगर निगम के लिए कूड़ा कलेक्शन यूजर चार्ज वसूलना बड़ी चुनौती बना हुआ है। नगर निगम कार्यकारिणी समिति ने यूजर चार्ज को अब हाउस टैक्स के साथ वसूलने का निर्णय लिया है। अप्रैल 2021 के बाद जारी होने वाले टैक्स बिलों में यूजर चार्ज भी शामिल किया जाएगा। लोगों को इसे हाउस टैक्स के साथ ही जमा करना होगा।
टैक्स के नाम पर लूट भी होगी खत्म
हाउस टैक्स के नाम पर नगर निगम के पांचों जोन में ‘लूट’ हो रही है। फैक्टरियों, फ्लैटों, व्यावसायिक संस्थानों पर टैक्स निर्धारण में खेल किया जा रहा था। जोन की ओर से नए संस्थानों को 8 से 10 साल पहले तक का टैक्स जोड़कर बिल भेजा जाता था। यह रकम लाखों में होती थी। इसके बाद सेटिंग का खेल किया जाता था। पैसा लेकर निगम के अधिकारी टैक्स का निर्धारण करंट साल से कर देते थे। भवन मालिक को होने वाले फायदे वाली रकम में से आधा-आधा बांट लिया जाता था। निगम का यह निर्णय भ्रष्टाचार लगाम की कोशिश है।