महाराष्ट्र पर छाया बर्ड फ्लू का साया, 33 हज़ार मुर्गियों का काम तमाम


  • महाराष्ट्र के विदर्भ में बर्ड फ्लू का भी खतरा मंडराने लगा है
  • विदर्भ कोरोना महामारी से बुरी तरह से शिकार हुआ है
  • प्रशासन ने बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए 33 हजार मुर्गियों को खत्म किया है
  • डेढ़ सौ लोगों की टीम हो बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए तैनात किया गया है
कांती जाधव,(महाराष्ट्र ब्यूरो)। महाराष्ट्र में जहां कोरोना वायरस  का खतरा सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। वहीं अब बर्ड फ्लू का खतरा भी राज्य पर मंडराने लगा है। यह खतरा महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में दस्तक दे रहा है आपको बता दें कि विदर्भ इलाका पहले से ही कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है।
विदर्भ में खतरा हुआ डबल
महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है। अब तक विदर्भ के अमरावती, यवतमाल, वाशिम और हिंगोली जैसे इलाकों कोरोना का खतरा तेजी से पैर पसार रहा है। अब अमरावती में बर्ड फ्लू की भी पुष्टि हुई है। यह जानकारी तब सामने आई जब भोपाल की लैब से आई रिपोर्ट ने प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें पैदा कर दीं।
नब्बे रुपये का मुआवजा
स्थानीय अधिकारी उदय सिंह राजपूत के मुताबिक बर्ड फ्लू की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर 33 हज़ार मुर्गियों को नष्ट कर दिया गया है। मुर्गियों के बदले प्रशासन ने पोल्ट्री फॉर्म मालिकों को प्रति मुर्गी 90 रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा है। जिन इलाकों से बर्ड फ्लू कि शिकायत आ रही है। उन इलाकों में पोल्ट्री फॉर्म मालिकों को यह मुआवजा दिया जा रहा है।
32 टीमें काम मे जुटी
फिलहाल प्रशासन की 32 टीमें बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए मुस्तैद हैं। पूरे इलाके में तकरीबन डेढ़ सौ अधिकारियों की तैनाती की गई है। प्रशासन की ई-मेल हर गांव में जाकर बर्ड फ्लू के खतरे का आंकलन कर रही हैं। मुर्गियों को जमीन में केमिकल लगाकर दफनाया जा रहा है।