52 लाख में नीलाम हुई 118 साल पुरानी गोरखपुर कलेक्ट्रेट की बिल्डिंग


गोरखपुर। अंग्रेजी हुकूमत के समय उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बना कलेक्ट्रेट भवन 52.21 लाख में नीलाम हो गया है। साल 1903 में बने इस भवन की बोली 21 लाख से शुरू हुई और लगभग 53 लाख में एक ठेकेदार को सौंप दी गई। कलेक्ट्रेट का नया भवन तकरीबन 3 सालों में बनकर तैयार होगा। तब तक जिले के आला अधिकारी पर्यटन विभाग के कार्यालय में बैठेंगे।
118 साल पुराना है कलेक्ट्रेट भवन का इतिहास
अंग्रेजी हुकूमत के समय बने इस भवन का निर्माण साल 1903 में शुरू किया गया था और लगभग 7 सालों में पूरा हुआ। गोरखपुर के कलेक्ट्रेट को आजादी के समय झंडा फहराने का गौरव भी प्राप्त है। यही नहीं, यहां की दीवारों ने चौरी-चौरा कांड के शहीदों से लेकर भारतीयों के साथ हुए अत्याचार के फैसलों को भी सुना है। बता दें कि साल 1947 में आजादी के बाद पहली बार एक भारतीय के तौर पर डीपी सिंह कलेक्टर के पद पर आसीन हुए और साल 2021 तक 65 जिलाधिकारी इस सभागार में बैठकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर चुके हैं।
आधुनिक तकनीक से लैस होगा नया भवन
कलेक्ट्रेट भवन के नीलामी के बाद ध्वस्तीकरण का काम जल्द शुरू होगा। नया भवन आधुनिक तकनीक से लैस होगा। नई बिल्डिंग इंटीग्रेटेड होने के साथ ही भूकंपरोधी भी होगी। वहीं इसमें अधिकारियों के लिए सौ से ज्यादा वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था भी होगी। लगभग 3 सालों में बनकर तैयार होने वाले इस भवन में प्रथम तल पर डीएम और एसएसपी कार्यालय, दूसरे तल पर डीएम कोर्ट और तीसरे तल पर मालखाना, रेकॉर्ड रूम, बैरक, लाइब्रेरी और किचन बनाया जाएगा। लिफ्ट की भी सुविधा होगी।
3 सालों में बनकर तैयार होगा भवन
गौरतलब है कि नया भवन 3 सालों में बनकर तैयार होगा जबकि अंग्रेजी हुकूमत में बने भवन का निर्माण लगभग 7 सालों में हुआ है। इसकी दीवारें 118 सालों के इतिहास की गवाही दे रही हैं। जनवरी 2021 में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसुविधा और सरकारी विभागों में तालमेल बैठाने के लिए एक परिसर में सभी कार्यालयों के निर्माण का ऐलान किया था।