अपनी कोख भरने के लिए तांत्रिक के कहने पर महिला ने पड़ोसी के बेटे की कर दी हत्या


  • बच्चा पाने की चाहत में महिला ने पड़ोसी के बेटे की बलि दी
  • शादी के आठ साल होने के बाद भी महिला का कोई बच्चा नहीं है
  • महिला ने बताया, ससुराल के तानों से मानसिक तौर पर परेशान थी
दिल्ली ब्यूरो। देश की राजधानी में बच्चे की चाह में एक महिला ने अंधविश्वास और तांत्रिक के चक्कर में पड़कर पड़ोसी के तीन साल के बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी। महिला ने बच्चे के शव को बोरे में बंद कर उसे पड़ोसी की छत पर फेंक दिया। बच्चे के नहीं मिलने पर परिजनों ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने छानबीन करने के बाद छत से बच्चे के शव को बरामद कर लिया और छानबीन कर महिला को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि शादी के आठ साल होने के बाद भी महिला को कोई बच्चा नहीं है। इसके लिए उसने हरदोई में एक  तांत्रिक से मुलाकात कर उपाए पुछे। तांत्रिक ने उसे एक बच्चे की बलि देने के लिए कहा था। पुलिस आरोपी महिला से पूछताछ कर जांच में जुटी है। वहीं बच्चे के घर में घटना के बाद से कोहराम मचा हुआ है। 
जिला पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने बताया कि गिरफ्तार महिला की पहचान मूलत: गांव सुंदाबल, हरदोई, यूपी निवासी नीलम गुप्ता(25) के रूप में हुई है। वह अपने पति पंकज गुप्ता के साथ रिठाला गांव में रहती थी। शनिवार शाम को पुलिस को रिठाला गांव गली नंबर 18 में तीन साल के पीयूष गुप्ता के लापता होने की जानकारी मिली थी। उसके पिता दयाराम गुप्ता ने बताया कि पीयूष छत पर मौजूद था। वह नीचे भी नहीं आया था। पुलिस ने तुरंत मामले की जांच शुरू की और छत पर छानबीन की। पुलिस को पड़ोस की छत पर एक बोरा मिला, जो दीवार से सटाकर रखा गया था।
पुलिस ने जब बोरा खोला तो उसमें पीयूष का शव मिला। उसके गर्दन पर निशान थे और होंट काले पड़ गए थे। शव मिलने के बाद वहां दहशत फैल गया। शव को कब्जे में करने के बाद पुलिस उस मकान में रहने वाले लोगों और पड़ोसियों ने पूछताछ शुरू की। जिसमें पता चला कि बच्चे को अंतिम बार पांचवीं मंजिल पर रहने वाली नीलम के साथ देखा गया था। नीलम ने पूछताछ के दौरान पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। शक होने पर पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। जिसमें उसने हत्या करने की बात कबूल कर ली। उसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
बच्चा नहीं होने पर ससुराल वाले देते थे ताना 
पूछताछ में नीलम ने बताया कि वर्ष 2013 में उसकी शादी पंकज से हुई थी। वह दिल्ली में सब्जी बेचता है। काफी साल तक उसे बच्चा पैदा नहीं हुआ। जिसकी वजह से ससुराल वाले उसे ताने देने लगे। वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी। काफी इलाज करवाने के बाद भी बच्चा नहीं हुआ। चार साल पहले वह हरदोई गई थी। जहां उसने एक तांत्रिक से मुलाकात की थी। जिसने उसे अपना बच्चा पाने के लिए एक बच्चे की बलि देने का सुझाव दिया। हालांकि वहां से आने के बाद वह एक बच्चे को गोद लेना चाह रही थी। लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। उसके बाद उसने अपने पड़ोसी के बच्चे की बलि देने का फैसला किया। वह मृत बच्चा और उसके परिवार से रोज मिलती थी।  बच्चा भी कई बार उनके घर पर आया करता था। लेकिन जब शनिवार को उसने पीयूष को छत पर अकेला देखा, तभी वह उसे अपने साथ कमरे में ले गई और पूजा करने के बाद उसका गला घोंट दिया। 
बच्चे के बाहर नहीं निकलने पर पांचवीं मंजिल पर रहने वालों पर हुआ शक 
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीयूष की तलाश के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना से पहले पीयूष छत पर था और वह बाहर नहीं निकला है। फिर कुछ ही देर में वह गायब हो गया। पड़ोस की छत पर बच्चा का शव मिलने के बाद पुलिस को पांचवीं मंजिल पर रहने वाले लोगों पर शक हुआ। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पांच मंजिला मकान में करीब 60 कमरे हैं। एक  एक घर की तलाशी ली। साथ ही पानी की टंकी की भी जांच की गई। नीलम के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को पूजा पाठ किए जाने की साक्ष्य मिले। आस पास के लोगों से उसके बारे में पता चला कि शादी के काफी अरसे बीत जाने के बाद भी उसे बच्चा नहीं है। जिससे शक और गहरा गया। पुलिस ने पहले उसके पति से पूछताछ की गई। जिसमें पता चला कि बच्चा नहीं होने से वह काफी परेशान रहती है। पुलिस ने शक के आधार पर महिला को हिरासत में लिया। जिसने बच्चे की हत्या करने का खुलासा हुआ।
बीच मिनट तक छत पर अकेला था पीयूष 
पीयूष के पिता दयाराम ने बताया कि वह मूलत: हरदोई के टुंडाबल गांव के रहने वाले हैं। वह दिल्ली में सब्जी बेचते हैं। परिवार में पत्नी चांदनी, बेटी श्रेष्टी(5), पांच महीने का अंश और पीयूष था। शनिवार सुबह में वह केशवपुरम मंडी गया हुआ था। सुबह नहाने के बाद पीयूष छत पर गया था। उसकी बहन श्रेष्टी छत पर पहुंची और उससे कहा कि मम्मी बुला रही है। यह कहकर श्रेष्टी नीचे आ गयी। करीब 20 मिनट तक पीयूष नहीं आया तो श्रेष्टी दोबारा छत पर उसे बुलाने के लिए पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। यह बात उसने अपनी मां को बताई। फिर परिवार वाले मकान में रहने वाले लोगों और आस पास रहने वालों से पूछताछ की। परिवार वालों ने दयाराम को पीयूष के गायब होने की जानकारी दी। मंडी से वह सीधा घर पहुंचा और पीयूष को तलाश ने की कोशिश की थी। जिसके बाद पुलिस को वारदात की जानकारी दी। 
पीयूष की मौत से परिवार में कोहराम 
अपने लाडले की मौत के बाद परिवार में कोहराम छाया हुआ है। मां का रो-रो कर बुरा हाल है। वह हर पल अपने बच्चे को वापस लाने के लिए गुहार लगा रही है। मां कह रही है कि उसे नहीं पता था कि महिला के मन में ऐसा कुछ चल रहा है जो उसके परिवार की खुशियों को उजाड़ देगा। उसने बताया कि आस पास के गांव के होने की वजह से एक दूसरे के घर आना जाना भी था। उसने कभी सपने में भी ऐसी घटना की कल्पना नहीं की थी। बहन भी अपने भाई के शव को देखकर खुद को रोक नहीं पाई और उसे गले लगाकर फफक-फफक कर रोने लगी। दयाराम बताते है कि भाई बहन में काफी प्यार था। दोनों हर वक्त एक साथ ही गुजारते थे। पीयूष के छत से नीचे नहीं आने पर वह भागकर उसे लेने के लिए गई थी लेकिन उसे वहां न पाकर वह तुरंत मां को आकर इसकी जानकारी दी थी।