बुन्देलखण्ड दिवस के रूप में मनाया गया शंकर लाल महरोत्रा का जन्मदिन


फतेहपुर ब्यूरो। बुन्देलखण्ड राज्य आंदोलन के जनक स्व. शंकर लाल महरोत्रा जी की जन्म जयन्ती पर बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति ने बुन्देली स्वयं सेवकों के साथ जनपद के खागा तहसील स्थित खखरेरू कस्बे के रामलीला प्रांगड़ शिव मंदिर में बीआरएस नगर अध्यक्ष अजय कोमल मोदनवाल के नेतृत्व में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष इं प्रवीण पांडेय ने स्व. शंकर लाल महरोत्रा के चित्र पर माल्यर्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए साथ ही बुन्देली साथियों के साथ मेडिकल कंपाउंडर फूलचंद्र सिंह द्वारा खून निकलवा कर खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को पत्र लिख अलग राज्य बुन्देलखण्ड बनाने के वादे को याद दिलाया। आपको अवगत करा दें जिस बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को शंकर लाल मेहरोत्रा ने 17 सितंबर, 1989 में मध्यप्रदेश के नौगांव से शुरू किया था, उसे आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश कांग्रेस का कोषाध्यक्ष पद छोड़ा, धन के लिए अपनी फैक्ट्री बेच दी, अपना विशाल कारोबार छोड़ दिया, लगातार भागदौड़ में अपनी सेहत गंवाई और रासुका में जेल गए लेकिन उनकी मृत्यु के 20 वर्ष बाद भी बुंदेलखंड राज्य का सपना पूरा नहीं हो पाया।
बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय  ने कहा कि शंकर लाल मेहरोत्रा की कुर्बानियां बेकार नहीं जाएंगी। हम उनके सपने को पूरा करेंगे। उनके जन्मदिन को बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाकर हम बुंदेले उनको सच्ची श्रद्धांजलि देंगे। उनके पुत्र नीरज मेहरोत्रा भी महोबा आकर हमारे "प्रधानमंत्री को खून से खत लिखो अभियान" में शामिल रहे। बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के जनक शंकर लाल मेहरोत्रा का जन्म नौ मार्च, 1948 को झांसी के प्रतिष्ठित कारोबारी सुंदर लाल मेहरोत्रा के घर हुआ था। उनके बेटे नीरज मेहरोत्रा बताते हैं कि पापा पहले कांग्रेस पार्टी में थे और मध्यप्रदेश के कोषाध्यक्ष थे। वे मानते थे कि जब तक बुंदेलखंड दो राज्यों के बीच पिसता रहेगा, इसका भला नहीं होने वाला। इसके लिए बुंदेलखंड अलग राज्य होना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ 17 सितंबर, 1989 को नौगांव के नजदीक महोबा जिले के धवर्रा गांव में हनुमान मंदिर में बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा का गठन किया और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आंदोलन को गति देने के लिए पूरे बुंदेलखंड में सभाएं, धरना प्रदर्शन शुरू करवाए लेकिन जब आंदोलन के लिए धन की कमी पड़ने लगी तो उन्होंने नौगांव में स्थापित अपनी डिस्टिलरी फैक्ट्री सवा करोड़ में बेच दी। अपने कारोबार को छोड़ दिया। 1993 में उन्होंने चर्चित टीवी प्रसारण बंद अभियान चलाया, 1994 में मध्यप्रदेश विधानसभा में बुंदेलखंड राज्य के लिए पर्चे फेंके, 1995 में लोकसभा में पर्चे फेंके जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने उनको नौ साथियों सहित गिरफ्तार करवा दिया। बाद में विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको छुड़वाया, फिर उन्होंने दिल्ली में जंतर मंतर पर एक महीने तक धरना प्रदर्शन किया जो अटल जी के सरकार आने पर बुंदेलखंड राज्य बनाने के आश्वासन के बाद खत्म हुआ। जून 1998 में झांसी के बरुआ सागर में हुई हिंसा आगजनी से अटल सरकार इतनी नाराज हो गयी उसने न केवल मेहरोत्रा जी व उनके साथियों पर रासुका लगा दी बल्कि 2000 में उत्तराखंड, झारखंड व छत्तीसगढ़ के साथ बुंदेलखंड राज्य भी नहीं बनाया। और इसी सदमे में 22 नवंबर, 2001 को उनकी मृत्यु हो गयी। उनके जाने के बाद आंदोलन की धार कमजोर पड़ गयी।
कार्यक्रम में केंद्रीय अध्यक्ष बीआरएस इं प्रवीण पांडेय, केंद्रीय प्रवक्ता देवब्रत त्रिपाठी, नगर अध्यक्ष अजय कोमल गुप्ता, भाजपा जिला मंत्री नीरज बाजपेयी, विनय तिवारी, शनि मोदनवाल, रितेश केसरवानी, प्रसून तिवारी आदि बुन्देली साथी मौजूद रहे।