महाराष्ट्र की महिला ने पाकिस्तान से लौटी गीता को बताया अपनी बेटी, डीएनए रिपोर्ट का इंतजार


  • पाकिस्तान से लौटी गीता को महाराष्ट्र की महिला ने बताया अपनी बेटी
  • महिला के बताए हुए निशान गीता के शरीर पर मिले
  • शरीर पर निशान मिलने के बाद अधिकारियों में जगी उम्मीद
  • डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी इसकी पुष्टि
इंदौर। पाकिस्तान से वर्ष 2015 में भारत लौटी गीता को महाराष्ट्र की 70 वर्षीय महिला ने अपनी बेटी बताया है। कुछ ब्योरों का मिलान होने के बाद उम्मीद जागी है, कि गीता को उसका खोया परिवार वापस मिल सकता है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक रूप से यह बात डीएनए टेस्ट के बाद ही साबित हो सकेगी कि यह महिला गीता की जैविक मां है या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त जन कल्याण विभाग ने दिव्यांगों की मदद के लिए इंदौर में चलाई जा रही आनंद सर्विस सोसायटी को गीता की देख-रेख और उसके बिछड़े परिवार की खोज का जिम्मा सौंपा है। गीता न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। संगठन के सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ ज्ञानेंद्र पुरोहित ने गुरुवार को "पीटीआई-भाषा" को बताया कि गीता महाराष्ट्र के परभणी की गैर सरकारी संस्था पहल फाउंडेशन के परिसर में रहकर कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रही है। पुरोहित ने बताया कि औरंगाबाद में रहने वाली मीना पांद्रे (70) ने दावा किया है कि गीता उनकी खोई बेटी है जो उनकी पहली शादी से पैदा हुई थी। उन्होंने बताया कि पांद्रे ने हमें बताया है कि गीता के पेट पर जलने का एक निशान है। यह बात सही पाई गई है। पुरोहित ने बताया कि गीता ने बचपन की धुंधली यादों के आधार पर उन्हें इशारों में बताया था कि उसके घर के पास एक नदी थी और वहां गन्ने तथा मूंगफली की खेती होती थी। इसके साथ ही वहां डीजल के इंजन से रेल चला करती थी
महाराष्ट्र में मिले हैं कुछ निशान
गीता की तरफ से बताए गए कुछ ये ब्योरे महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके के कुछ स्थानों से मेल खाते हैं। इस बीच, मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त जन कल्याण विभाग की संयुक्त संचालक सुचिता तिर्की ने बताया कि डीएनए टेस्ट के बाद ही पांद्रे के इस दावे की पुष्टि हो सकेगी कि गीता उनकी बेटी है। अधिकारियों ने बताया कि बीते साढ़े पांच साल के दौरान देश के अलग-अलग इलाकों के 20 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी बेटी बता चुके हैं। लेकिन सरकार की जांच में इनमें से किसी भी परिवार का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो सका है।