नागपुर में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच अस्पतालों में बढ़ीं बेड की मांग, स्ट्रेचर पर सुलाए जा रहे हैं मरीज


  • तेजी से नागपुर में बढ़ रही है कोरोना मरीजों की संख्या
  • नागपुर में अस्पतालों में बेड के लिए बढ़ रही है मारामारी
  • नागपुर प्रशासन ने अस्पतालों में बेड बढ़ाने के सभी प्रयास और भी तेज कर दिए हैं
  • हेल्पलाइन के जरिए लोगों को बेड मुहैया करवाने का प्रयास किया जा रहा है
नागपुर। नागपुर शहर में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों में बेड की मांग भी बढ़ रही है। नागपुर महानगरपालिका और जिला प्रशासन मिलकर हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि नागरिकों को समय पर अस्पतालों में बैठ उपलब्ध कराया जा सके लेकिन सभी कदम नाकाफी साबित होते हुए नजर आ रहे हैं।
बेड की तलाश में भटकते मरीज
नागपुर में आलम यह है कि मरीजों और उनके रिश्तेदारों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। अब मरीजों को खुद ही बेड की तलाश में यहां से वहां भटकना पड़ रहा है। लोगों को फोन करने पड़ रहे हैं और सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है ताकि उनकी समस्या पर लोगों का ध्यान जा सके। जिन लोगों को किसी पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद बेड मिल जा रहा है वह अपने आप को खुशनसीब समझ रहे हैं।
प्राइवेट रूम की सुविधा बंद
वहीं निजी अस्पतालों का कहना है कि उन्होंने अब मरीजों को स्ट्रक्चर्स पर भी लेट आना शुरू कर दिया है। इसके अलावा प्राइवेट रूम की सुविधा को भी खत्म कर दिया है। ताकि लोगों को अस्पताल में जगह मिल सके। कुछ निजी अस्पतालों ने आईसीयू में बेड की संख्या भी बढ़ाई है। आपको बता दें कि हर निजी अस्पताल में 20 से 25 मरीजों की वेटिंग लिस्ट लगी हुई है। अस्पतालों में वेंटिलेटर की भी किल्लत बनी हुई है।
अस्पतालों में लोगों की कमी
नागपुर महानगरपालिका के मुताबिक उनके सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में भी बेड उपलब्ध है लेकिन उन्हें चलाने के लिए और मरीजों के देखने के लिए हॉस्पिटल स्टाफ कि काफी किल्लत है। जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों से भी कहा है कि जो भी मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया जा रहे हैं उन्हें मना ना किया जाए बल्कि उनका इलाज करें।
विदर्भ हॉस्पिटल एसोसिएशन के अधिकारी डॉ अनूप कुमार ने बताया कि पेशेंट को तभी भक्ति किया जा रहा है। जब किसी दूसरे पेशेंट को इलाज के बाद डिस्चार्ज मिल रहा है। उन्होंने बताया कि हर दिन तकरीबन 10% लोगों को अस्पतालों से डिस्चार्ज किया जा रहा है लेकिन तुरंत ही बेड फुल हो जा रहे हैं क्योंकि लंबी वेटिंग लिस्ट लगी हुई है। उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से भी क्लेम की खानापूर्ति में अस्पताल और मरीजों का काफी समय बर्बाद होता है।
ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों को तेज गति से काम करना होगा। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे अगर किसी मरीज को इंश्योरेंस के काम के लिए बताया जाता है। तो इंश्योरेंस कंपनियां इसको पूरा करते-करते शाम के 6 बजा देती हैं। जिसकी वजह से कई लोगों को बेड के लिए इंतजार करना पड़ता है।
बढ़ रही है कोरोना मरीजों की संख्या
नागपुर शहर में बीते 24 घंटों में अंदर 2272 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। जबकि नागपुर ग्रामीण में 823 नए मामले सामने आए हैं। वहीं बीते 24 घंटों के अंदर 29 लोगों की मौत हुई है। जिले में फिलहाल कुल एक्टिव मामलों की संख्या 31हज़ार 993 है। जबकि 24 घंटों में 14900 56 लोगों का टेस्ट किया गया है।