हिंदू शिक्षक ने खून देकर बचाई मुस्लिम महिला की जान, सगे-संबंधी नहीं आए काम



  • हिंदू शिक्षक ने खून देकर बचाई मुस्लिम महिला की जान
  • आरा के अस्पातल में प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी महिला
  • परिवार के सगे-संबंधी और जान-पहचान वाले नहीं आए काम
  • सोशल मीडिया के जरिए वेद प्रकाश सामवेदी को मिला था मैसेज
आरा। किसी भी समाज में ऊंच-नीच, जाति-धर्म, भेदभाव-नफरत होता है। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। दुनिया के अमूमन सभी समाज और समुदायों में गुण-अवगुण दोनों होते हैं। मगर इसी समाज में प्यार, मोहब्बत, आदमियत और इंसानियत भी है। तभी तो आरा के वेद प्रकाश सामवेदी को सोशल मीडिया के जरिए मिला मैसेज अस्पताल तक खींच लाया। इन्होंने प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक मुस्लिम महिला को खून देकर जान बचा दी।
मानवता की मिसाल वेद प्रकाश सामवेदी
भले ही लोग जाति-धर्म के नाम पर एक-दूसरे को बांटते हों। समाज में नफरत फैलाते हों। एक-दूसरे को भेदभाव की नजर से देखते हों। मगर सबलोग ऐसे नहीं हैं। इसी समाज में कुछ अच्छे लोग भी हैं। जिनमें वेद प्रकाश सामवेदी का नाम भी शुमार है। वेद प्रकाश जैसे लोगों की वजह से सामाजिक समरसता कायम है। इंसान, एक इंसान के काम आकर उसकी जिंदगी बचा देता है। मामला चाहे किसी का भी हो, अगर किसी की जान खून देकर बचाई जाए तो इससे बढ़कर मानवता की सेवा और क्या हो सकती है। शरीर के अंदर प्रवाह कर रहे खून का जाति-धर्म और ऊंच-नीच से कुछ लेना-देना नहीं है। जिसका ग्रुप मैच कर गया, वही उसका अपना है।
प्रसव पीड़ा से बेचैन थी जैबून निशा
चरपोखरी प्रखंड के मानसागर गांव की रहने वाली जैबून निशा प्रसव पीड़ा से आरा के एक निजी अस्पताल में बेचैन थीं। उनको खून की काफी कमी थी। डॉक्टर बार-बार खून की मांग कर रहे थे। परिजनों ने अपने सगे संबंधियों से लेकर जान-पहचान वालों से गुहार लगाई। लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। सोशल मीडिया के जरिए पेशे से शिक्षक वेद प्रकाश सामवेदी को सूचना मिली। दिए गए नंबर सामवेदी ने फोन किया और ब्लड देने की इच्छा जताई। आखिरकार जैबून निशा की जान बच गई। परिवार में खुशहाली लौट आई। महिला के परिजनों ने शिक्षक वेद प्रकाश को धन्यवाद दिया।
बारा मिडिल स्कूल में तैनात हैं सामवेदी
मूल रुप से अरवल जिले के कामता गांव के रहनेवाले शिक्षक वेद प्रकाश सामवेदी कतिरा मुहल्ले में रहते हैं। संदेश प्रखंड के बारा मिडिल स्कूल में तैनात हैं। उनके इस काम की सराहना उनके साथी शिक्षक भी कर रहे हैं। वेद प्रकाश ने कहा कि वो अब तक 18 बार रक्तदान कर लोगों की जान बचा चुके हैं। सामान्य रुप से स्वस्थ्य व्यक्ति साल में 2 से 3 बार रक्तदान कर सकता है। इससे आपको मानसिक सुकून के साथ, सुखद अनुभूति मिलती है।