लोनी में क्लीनिक पर गर्भपात कराती फिजियोथेरेपिस्ट गिरफ्तार


प्रेम प्रकाश त्रिपाठी,(गाजियाबाद ब्यूरो)। गाजियाबाद के लोनी में एक बार फिर लिंग परीक्षण और गर्भपात करने का मामला सामने आया है। एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट को पुलिस ने गर्भपात कराते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। फिजियोथेरेपिस्ट अपने क्लीनिक पर पांच महीने से गर्भपात करा रही थी। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए क्लीनिक पर सील लगा दी है। अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए।
पीसीपीएनडीटी (प्री कंसेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) एक्ट के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि लोनी के इकराम नगर कॉलोनी में परीक्षण किए जाने की शिकायत डीएम से की गई थी। डीएम अजय शंकर पांडेय ने सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिया। मंगलवार को डीएम के निर्देशन में एक टीम लोनी पहुंची। वहां एसडीएम शुभांगी शुक्ला के नेतृत्व में राज क्लीनिक पर छापा मारा गया। क्लीनिक में पर महिला फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सीमा को एक महिला का गर्भपात करते हुए रंगेहाथ पकड़ा। फिजियोथेरेपिस्ट के क्लीनिक का पंजीकरण नहीं था। वह लोनी निवासी है। पूछताछ में पता चला कि क्लीनिक पांच महीने पहले शुरू हुआ था। तब से गर्भपात किए जा रहे हैं। लिंग की जांच किसी ओर सेंटर पर होती थी। उसका पता किया जा रहा है। एसीएमओ ने बताया कि क्लीनिक में कई लोग काम करते हैं। वह छापा के दौरान फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। इस संबंध में धोखाधड़ी और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पिछले पांच साल से लगातार लोनी क्षेत्र लिंग परीक्षण एवं गर्भपात का केंद्र बन गया है। अधिकांश मामलों में हरियाणा के अलग-अलग जिलों से स्वास्थ्य विभाग की टीम आकर छापा मारती है। यहां तक कि कई मामलों में गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग को तब जानकारी मिल पाती है, जब टीम पूरी कार्रवाई कर चुकी होती है। गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ एक सफाई दी जाती है कि सेंटर पंजीकृत नहीं था।
10 फरवरी को बनाई टीम
पीसीपीएनडीटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने 10 फरवरी को हरियाणा और गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बैठक कर रणनीति बनाई थी। डॉ. सुनील त्यागी ने दूसरे दिन पत्र जारी कर बताया कि मशीन पोर्टेबल थी और उसका पंजीकरण नहीं था। ऐसे में जिले में लिंग परीक्षण के खेल पर लगाम लग पाएगी, इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
लंबे समय से नहीं हो रहा पंजीकरण
जिले में 378 अल्ट्रासाउंड सेंटर स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत है। इनमें से कुछ सेंटर संचालकों ने लाइसेंस सरेंडर करते हुए जांच बंद करने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी है, जबकि जो संचालित हो रहे हैं, उनका भी नवीनीकरण न होने से अवैध की तरह ही संचालित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के चलते शासन स्तर से मार्च-अप्रैल में होने वाले लाइसेंस नवीनीकरण को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नवीनीकरण चल रहा है। अधिकांश सेंटरों का नवीनीकरण हो चुका है, जिनका अभी नहीं हो पाया है, उनकी फाइल चल रही है। जल्द ही नवीनीकरण हो जाएगा। पीसीपीएनडीटी एक्ट का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।- डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ