झूठ बोलकर लखनऊ शताब्दी में ज्वलनशील पदार्थ भेजने वाला गिरफ्तार


गाजियाबाद ब्यूरो। नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी के लगेज कोच में मिले बैटरी, मोबाइल क्लीनर लिक्विड जैसे ज्वलनशील और प्रतिबंधित वस्तु दिल्ली से लोड किए गए थे। इस सामान को बुक करने वाले ज्ञानेंद्र पांडेय नाम के व्यक्ति को आरपीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। आरपीएफ के सीनियर अधिकारियों ने मामले की पड़ताल के लिए तीन टीमों का गठन किया है। वहीं, आग लगने के कारणों की तह तक पहुंचने के लिए आरपीएफ अधिकारियों ने गाजियाबाद एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री) के अधिकारियों से भी जांच में मदद मांगी है।
शनिवार सुबह 6:41 बजे गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंची नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस में हुए इस अग्निकांड के बाद आरपीएफ के सीनियर डीएससी (कोऑर्डिनेशन) अपूर्व अग्निहोत्री ने तीन जांच टीमों का गठन किया था। इसमें से एक टीम गाजियाबाद स्टेशन पर हुई घटना की जांच कर रही है, दूसरी टीम नई दिल्ली स्टेशन स्थित सामान के लोडिंग प्वाइंट पर जांच कर रही हैं और तीसरी टीम सीसीटीवी फुटेज खंगालने व सुबूत जुटाने का काम कर रही है।
रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार ने बताया कि हादसे के दौरान ट्रेन के लगेज कोच से एसिड बेस्ड बैटरी के आइटम, ब्लूटूथ, मोबाइल क्लीनर लिक्विड और एम्पलीफायर आदि मिले थे। इन्हीं को आग लगने का कारण माना जा रहा है। आरपीएफ ने जांच करने पर पाया कि ज्ञानेंद्र पांडेय नाम के व्यक्ति ने रेलवे को गलत जानकारी देकर यह सामान बुक कराया था। उसने रेलवे के बुकिंग नोट में इस सामान को इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम या मोबाइल एसेसरीज दर्शाने की बजाय कोरियर गुड्स दर्शाया था।
आरपीएफ की टीम ने इस सामान को बुक कराने वाले ज्ञानेंद्र पांडेय को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने सामान बुक कराने की बात कुबूल कर सामान की पहचान भी की है। अधिकारियों का कहना है कि ज्ञानेंद्र पांडेय की वजह से ही यात्रियों की जान जोखिम में आ गई थी। आरपीएफ ने गाजियाबाद फॉरेंसिक टीम से जांच में मदद मांगी है। इसके लिए ट्रेन से बरामद किया गया जला हुआ सामान सोमवार को एफएसएल टीम के सुपुर्द किया जाएगा।
नई दिल्ली से ही ट्रेन में उठना शुरू हो गया था धुआं
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नई दिल्ली स्टेशन से ही लखनऊ शताब्दी के लगेज कोच से धुआं उठना शुरू हो गया था। माना जा रहा है कि एसिड युक्त बैटरी या ब्लूटूथ डिवाइस ऑन हो जाने की वजह से आग लगी। हालांकि इसकी विस्तृत जांच अभी की जा रही है। जांच में पता चला है कि नई दिल्ली स्टेशन से ट्रेन के चलने के बाद आग बढ़ती चली गई और गाजियाबाद पहुंचने तक आग की लपटें उठने लगी थीं। कोच का दरवाजा सील होने के कारण लपटें बाहर नहीं दिखाई दे रही थीं, कोच की छोटी जालियों में से सिर्फ धुआं बाहर निकल रहा था। नई दिल्ली स्टेशन पर ही अगर धुआं निकलते देख लिया गया होता तो आग बढ़ने से पहले ही काबू कर लिया गया होता और माल का नुकसान भी कम होता।