देश के सबसे बड़े रेलवे टिकट रैकेट को ध्वस्त करने वाले आरपीएफ अधिकारी को मिला डीजी से सम्मान


  • देश के सबसे बड़े ऑनलाइन टिकट घोटाले के पर्दाफाश में शामिल अधिकारियों का हुआ सम्मान
  • अहम भूमिका निभाने वाले उप निरीक्षक पांडुरंग पाटील को मिला डीजी से सम्मान
  • पाटिल एवं टीम ने पूरे देश में आरपीएफ डीजी के मार्गदर्शन में करीबन 78 करोड़ के रेलवे टिकट जप्त किए थे
  • देश भर में हुई थी आरपीएफ द्वारा हुई थी छापेमारी
पुणे। मुंबई समेत देशभर में रेलवे में टिकट के दलालों के खिलाफ कुछ साल पहले आरपीएफ की विशेष टीम ने एक बड़ा अभियान चलाया था। जिसके तहत तकरीबन 78 करोड़ रुपये के ई टिकट जब्त किए गए थे। यह कार्रवाई आरपीएफ की तरफ से अब तक की बड़ी कार्रवाई मानी जाती है। लगातार लोगों की शिकायत आ रही थी कि उन्हें ट्रेन में कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है। जिसके बाद आरपीएफ में विशेष टीम बनाकर तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों को यह काम सौंपा गया था।
इस टीम में आरपीएफ के उप निरीक्षक पांडुरंग धनराज पाटिल भी शामिल थे। जिन्हें उनके विभाग में टेक कॉप के रूप में भी जाना जाता है। पुणे की आरपीएफ साइबर क्राइम डिवीजन में रहते हुए पाटिल ने ना सिर्फ टिकट दलालों को अपने तकनीकी ज्ञान से पकड़ा बल्कि उनके रैकेट को भी ध्वस्त करने का काम किया था। इसके अलावा भी उन्होंने कल्याण आरपीएफ में भी रहते हुए कई महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाया था। जिसमें से ट्रेनों के जरिये होने वाली शराब की तस्करी के मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी।
एंटीलिया विस्फोट मामले और मनसुख हत्या मामले एपीआई सचिन वझे की गिरफ्तारी और उसके बाद मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के लेटर बम की वजह से मुंबई और महाराष्ट्र पुलिस की छवि दागदार हुई है। हालांकि इसके उलट महाराष्ट्र में रेलवे विभाग के अंदर बढ़ रहे साइबर क्राइम को रोकने में आरपीएफ के जवानों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। ताकि जनता का भरोसा पुलिस महकमे से डिगने ना पाए।
बेहतरीन काम के लिए सम्मान
आरपीएफ के उपनिरीक्षक पांडुरंग धनराज पाटिल को उनके बेहतरीन काम के लिए आरपीएफ डीजी की तरफ से महानिदेशक पद चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें 26 मार्च 2021 को दिया गया है।