गाजियाबाद में बिजली विभाग की लापरवाही बच्ची पर पड़ी भारी, सड़क पर गिरे बिजली के तार की चपेट में आई बच्ची का कटा हाथ


गाजियाबाद ब्यूरो। बिटिया को भगवान पर बहुत भरोसा था। उसका रूटीन मंदिर से ही शुरू होता। 15 फरवरी को भी मंदिर के लिए घर से निकली थी। गाजियाबाद के न्यू आर्य नगर में पेट्रोल पंप के सामने से गुजर रही थी। रास्ते में बिजली का तार गिरा था। उसका पैर फिसला और तार पर गिर गई। 15 दिन अस्पताल में रही। जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने दाहिना हाथ और अंगूठा काट दिया। 11 साल की मीनाक्षी के पिता नंदू आगे एक शब्द नहीं बोल सके। घर के हर शख्स की नम आखों और सिसकियों ने बगैर किसी शब्द के बेलगाम अफसरशाही की कहानी सुना दी। हादसे को एक महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। फिर भी पुलिस ने रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की। लापरवाही करने वाले विभाग के मुखिया कार्रवाई के लिए अभी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे। हरवंश नगर में रहने वाले नंदू कबाड़ी का काम करते हैं। नंदू ने बताया कि 15 फरवरी को बिजली विभाग की लापरवाही से तार टूटकर सड़क पर गिरा था। बेटी मीनाक्षी ने समझा कि उसमें करंट नहीं है। फिर भी वह दूर से निकलने की कोशिश कर रही थी। सड़क पर पानी था और उसका पैर फिसल गया। गिरते ही तेज चिंगारी उठी और मीनाक्षी बुरी तरह झुलस गई। आसपास के लोगों ने बताया तो तुरंत लेकर एमएमजी अस्पताल गए। वहां से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। 15 दिन तक मीनाक्षी सफदरजंग में भर्ती रही। डॉक्टरों ने कंधे से उसका दाहिना हाथ काट दिया। पैर का एक अंगूठा भी काटना पड़ा। 
थाने और चौकी के एक महीने लगवाए चक्कर
बिटिया का सिर गोदी में लेकर बैठे नंदू की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। सुबकते हुए बोले, इतना बड़ा दुख देने वालों को भगवान कैसे माफ करेंगे। हम गरीब हैं। हमारी नहीं सुनेंगे, लेकिन कल अपने ईश्वर से कैसे नजर मिलाएंगे। बिटिया को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सिहानी गेट थाने गया। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, लाइनमैन के खिलाफ शिकायत दी। थाने से चौकी भेज दिया गया। इन्साफ की आस में अस्पताल से मौका मिलते ही कभी थाने तो कभी चौकी जाता। हर पुलिसवाले से मिन्नतें करता कि केस दर्ज कर लो। किसी ने भी मदद नहीं की।
'मिन्नतों के बाद पुलिसवाले ने कहा, डीएम के पास जाओ'
नंदू ने कहा, थाने और चौकी का एक-एक पुलिसकर्मी चेहरा देखकर पहचानने लगा था। एक महीने में कोई भी ऐसा दिन नहीं बीता होगा, जब फरियाद लेकर न गया हूं। बहुत मिन्नतें की तो एक पुलिसवाले ने एसडीओ के पास जाने की सलाह देकर थाने से बाहर कर दिया। बिटिया के इलाज में भी किसी ने मदद नहीं की। जो कुछ बचाया था, अब तक सब खर्च हो गया। हमारा दर्द पार्षद राकेश त्यागी ने सुना तो वे मदद के लिए आए। चीफ इंजीनियर से मिले।