चूड़ी की फैक्ट्रियों में 12-18 घंटे तक काम करते थे बच्चे!, 45 नाबालिग बच्चों को किया गया रेस्क्यू


राजीव गौड़,(दिल्ली ब्यूरो)। दिल्ली के जहांगीरपुरी से 45 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। 7 से 15 साल के इन बच्चों को जहांगीरपुरी के अलग-अलग इलाके से बुधवार को छुड़वाया गया। सभी से चूड़ी बनाने वाले फैक्ट्रियों में काम करवाया जा रहा था। प्रयास चाइल्डलाइन (1098) को बाल मजदूरी की यह शिकायत उनकी हेल्पलाइन नंबर 1098 पर मिली थी। दिल्ली पुलिस, एसडीएम की टीम के साथ प्रयास चाइल्डलाइन ने यह रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया। इन बच्चों से 12 से 18 घंटे तक काम करवाने का आरोप है। इसके बावजूद इन्हें तनख्वाह नहीं दी जाती थी, बिहार में रहने वाले इनके पैरंट्स को ही पैसा भेजा जाता था। रेस्क्यू टीम ने बताया कि इन बच्चों के लिए काम के बदले महज 3 से 5 हजार रुपये महीने तय था।
रेस्क्यू टीम में शामिल प्रयास चाइल्डलाइन के सुपरिंटेंडेंट मुकेश कुमार ने बताया कि जहांगीरपुरी इलाके में चूड़ी बनाने की कई फैक्ट्रियां हैं। हमारी इमरजेंसी हेल्पलाइन 1098 में हमें सूचना मिली कि कई फैक्ट्रियों में नाबालिग बच्चों से काम करवाया जा रहा है। बाल मजदूरी की इस शिकायत पर हमने डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स को सूचना दी। एडीएम, तहसीलदार, दिल्ली पुलिस के साथ इस जॉइंट ऑपरेशन में हमने पांच लोकेशन से 45 बच्चों को रेस्क्यू किया। ये 7 से 15 साल के हैं और सभी लड़के हैं। ज्यादातर बिहार से हैं, जो ट्रैफिकिंग के जरिए यहां लाए गए हैं। इन्हें सिर्फ 3 हजार से 5 हजार रुपये की रेंज में हर महीने पैसे दिए जाते थे। मगर बच्चों को नहीं, इनके परिवार को भेजे जाते थे। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक रेड मारी गई।
मुकेश ने बताया कि बच्चे खराब और खतरनाक स्थिति में काम कर रहे थे। चूड़ी बनाने में केमिकल का इस्तेमाल होता है और इन्हें बिना बचाव के यह काम करवाया जा रहा था। एक बच्चे के चेहरे में इन्फेक्शन है, कई बच्चे कुपोषित हैं। किसी ने मास्क नहीं पहना था। रेस्क्यू के बाद इन्हें मास्क दिए गए और सबका कोविड-19 टेस्ट हुआ। सभी नेगेटिव थे। सभी का मेडिकल किया गया और पुलिस ने सबका बयान लिया। अब एसडीएम और चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के सामने इन्हें पेश किया जाएगा और बयान लिए जाएंगे। इन्हें बाल गृह भेज दिया गया है और इनके पैरंट्स बुलाए जाएंगे। मुकेश ने बताया कि अब बच्चों का बकाया पैसा, ओवरटाइम का पैसा, मिनिमम वेजेज के हिसाब से बकाया पैसा इन्हें दिलवाया जाएगा। पुनर्वास के लिए भी काम किया जाएगा। दिल्ली पुलिस फैक्ट्रियों के मालिकों के खिलाफ एक्शन लेगी।