कोरोना से जहाजरानी मंत्रालय के महानिदेशक समेत 12 की मौत


ग्रेटर नोएडा। जिले में कोरोना से 24 घंटे में 12 लोगों की मौत हो गई। सेक्टर-24 स्थित दीप पोत एवं दीप स्तंभ महानिदेशालय, जहाजरानी मंत्रालय के महानिदेशक ई. मूर्ति की भी सुबह कोरोना से जान चली गई। जिले में अब तक 192 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मरीजों की हालत गंभीर थी। मंगलवार को भी 12 लोगों की संक्रमण से मौत हुई थी। वहीं, बुधवार को 903 नए मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई है। इसमें से अधिकतर मरीज होम आइसोलेशन में हैं।
जिले के विभिन्न अस्पतालों में लोगों ने दम तोड़ा है। चार मौतें फोर्टिस, दो मेट्रो और दो शारदा अस्पताल में हुई हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिले में 10 मौतें हुई हैं, लेकिन पोर्टल पर 2 अतिरिक्त मौतों की गलत जानकारी अपलोड कर दी गई है। उसे ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा 24 घंटे में ठीक होने पर 588 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। अब तक कुल 31125 लोग संक्रमण को मात देकर ठीक हो चुके हैं। पहली बार जिले में सक्रिय 7202 मरीज हो गए हैं।
जिले में नहीं मिला बेड तो महानिदेशक को आर्मी अस्पताल में कराया था भर्ती
सेक्टर-34 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि जहाजरानी मंत्रालय के महानिदेशक ई. मूर्ति सेक्टर-34 के नीलगिरी अपार्टमेंट में रहते थे, जबकि उनका परिवार चेन्नई में था। शनिवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। पहले भी उनका इलाज चल रहा था। रविवार को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। उन्हें कई अस्पताल में लेकर गए, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। उन्हें दिल्ली स्थिति आर्मी अस्पताल में बड़ी मुश्किल से भर्ती किया गया। बुधवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। परिवार शुक्रवार को नोएडा आ गया था।
11 दिनों में ज्यादा बिगड़े हालात
कुछ दिनों में जिले की कोरोना संक्रमण को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो 11 दिनों में नए संक्रमित मरीज और मौत के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं। इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। जबकि पूरे अप्रैल में 103 लोगों को मौत हो चुकी है। ये जिले में संक्रमण से होने वाली कुल मौतों का 53 प्रतिशत है। अप्रैल महीने में 12,452 नए संक्रमित मिले हैं।
कंट्रोल रूम भी नहीं दिला पा रहा बेड
कोविड कंट्रोल रूम में फोन करने पर मरीज का रजिस्ट्रेशन हो रहा है, लेकिन जब परिजन मरीज को अस्पताल लेकर जाते हैं तो बेड ही नहीं मिलता। कहीं ऑक्सीजन की कमी तो कहीं बेड की कमी होने से मरीज को भर्ती करने से मना किया जा रहा है। इस चक्कर में मरीज इलाज के अभाव में ही दम तोड़ रहा है। यहां तक की अगर मरीज का आधार कार्ड दूसरे जिले का है तो उसे भर्ती नहीं किया जा रहा है। भले ही वो शख्स जिले में रहता हो।