कोरोना की मार से कानपुर बेहाल, 24 घंटे धधक रही श्मशान की आग, नहीं कम हो रहीं कतारें


  • कोरोना वायरस ने समूचे कानपुर शहर को अपनी चपेट में ले लिया है
  • ऑक्सिजन की कमी होने से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है
  • मौत हो जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए लगी है टोकन की लाइन
कानपुर ब्यूरो। कोरोना वायरस ने समूचे शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। संक्रमण की दूसरी लहर ने कोविड पेशेंट और नॉन कोविड पेशेंट को ऑक्सिजन पर ला दिया है। ऑक्सिजन की कमी होने से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। मरीजों को जिंदा रहने के लिए पहले बेड और ऑक्सिजन के लिए संघर्ष करना पड़ा, फिर मौत हो जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी टोकन की लाइन में लगना पड़ रहा है। कानपुर में मौतों का आकड़ा इस कदर बढ़ा है कि श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए चार से पांच घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।
चिलचिलाती धूप में श्मशाम घाटों पर शवों की लंबी कतारें लगी हैं। अंत्येष्टी स्थल पर चिताएं लगाने की जगह नहीं है। घाटों पर लोग रेती के किनारे या फिर जिसकों जहां जगह मिल रही, वहीं पर शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। स्वर्ग आश्रम में अंत्येष्टी स्थल पर जगह नहीं मिली तो वहां पर बने पार्क में ही शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। रविवार को स्वर्ग आश्रम से आई तस्वीरों ने सभी को विचलित कर दिया। शवों की लंबी कतारें लगी है। कानपुर के प्रमुख घाटों में क्षमता से अधिक शव पहुंच रहे है।
कोरोना ने बदली अंतिम संस्कार की परंपरा
कोरोना वायरस ने सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार की परंपराओं को भी बदला है। श्मशाम घाटों पर रात में भी चिताएं धधकेंगी, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। श्मशाम घाटों में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देर रात तक चल रही है। चारों तरफ चिताओं से उठती लपटें और धुएं के अलावा कुछ नहीं है। मृतकों के परिजनों की आंखो में गम के आंसू हैं।
विद्युत शवदाह गृह में लगी शवों की लाइन
जिले में संक्रमित और लावारिस लाशों का दाह संस्कार विद्युत शवदाह गृह में किया जा रहा है। कानपुर के भैरवघाट के विद्युत शवदाह गृह में दो इलेक्ट्रानिक भट्ठियां लगी हैं और भगवतदास घाट में एक इलेक्ट्रानिक भट्ठी लगी है। भैरवघाट और भगवतदास घाट की इलेक्ट्रनिक भट्ठियां 24 घंटे धधक रहीं हैं। बीते शनिवार को भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह में 82 शव पहुंचे थे। दोनों इलेक्ट्रानिक भट्ठियों में देररात तक शव जलाए जाते रहे। वहीं रविवार को शाम तक 50 से अधिक शव पहुंचे थे। इसके साथ ही भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह परिसर में ही लड़कियों से अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। भगवतदास विद्युत शवदाह गृह में भी बड़ी संख्या में मृतकों के शव पहुंच रहे हैं।