भोपाल के एक मुक्तिधाम में मंगलवार को हुआ 94 शवों का अंतिम संस्कार, सरकारी आंकड़ों में केवल 3 मौतें


  • एमपी में कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों में हेरफेर
  • 20 अप्रैल को मुक्तिधाम में हुए अंतिम संस्कार और सरकारी आंकड़ों में बड़ा फर्क
  • राज्य सरकार पर पहले भी लगे हैं आंकड़े छिपाने के आरोप
भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों को छिपाने का सरकारी खेल अब भी जारी है। मंगलवार को राजधानी भोपाल के एक ही मुक्तिधाम में 94 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन सरकार के आंकड़ों में मंगलवार को केवल 3 मौतें बताई गई हैं। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
मध्य प्रदेश सरकार पर कोरोना वायरस से होने वाली मौतों के आंकड़े छिपाने के पहले भी आरोप लगते रहे हैं। भदभदा विश्राम घाट के एक अधिकारी ने 16 अप्रैल को बताया था कि इस महीने के पहले 16 दिनों में यहां 1100 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनमें से लगभग 800 शवों का अंतिम संस्कार कोविड-19 के प्रोटोकॉल के मुताबिक किया गया। लेकिन सरकार के आंकड़ों में 16 अप्रैल तक राजधानी में केवल 38 मौतें ही दर्ज हैं।
भोपाल कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश के 10 शहरों में शामिल है। यहां कोरोना संक्रमण इतना विकराल हो चुका है कि मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे। श्मशान घाटों में शवों के ्ंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिल रही। और तो और, राजधानी के अस्पतालों में शवों को जलाने के लिए लकड़ी भी कम पड़ रही है और इसकी सप्लाई होशंगाबाद से की जा रही है।
स्थानीय मीडिया में मौत के आंकड़ों में हेरफेर की चर्चा पिछले कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अधिकारी अब तक इस पर कोई जवाब देने से बच रहे हैं। ताजा सबूतों के सामने आने के बाद अपने बचाव के लिए वो कौन सा बहाना बनाते हैं, अभी यह देखना बाकी है।

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