अवैध रूप से चलाए जा रहे कसीनो के मामले में एसएचओ लाइन हाजिर


नई दिल्ली। महिपालपुर के फाइव स्टार होटल रेडिसन ब्लू में अवैध रूप से चलाए जा रहे कसीनो के मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव के आदेश पर वसंत कुंज (साउथ) थाने के एसएचओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। शुरुआती जांच में इस मामले में उनकी सुपरविजन की कमी सामने आ रही है। इससे पहले होटल की बीट वाले एक हवलदार और दो सिपाहियों को लाइन हाजिर किया जा चुका है।
साउथ-वेस्ट दिल्ली के डीसीपी इंगित प्रताप सिंह ने बताया कि एसएचओ अजय नेगी को लाइन हाजिर किया गया है। डीसीपी ने यह भी बताया कि पुलिस की ओर से लाइसेंसिंग डिपार्टमेंट को लेटर लिखकर रेडिसन ब्लू में ईटिंग और स्टे पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल होटल के प्रेजिडेंशियल सुइट को सील कर दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि होटल में एंट्री-एग्जिट की डिटेल नोट करने वाले रजिस्टरों और कंप्यूटर को भी सीज कर लिया गया है। होटल के सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए गए हैं। इन तमाम सबूतों से यह पता लगाया जाएगा कि इसमें होटल वालों की कितनी मिलीभगत थी। जांच में यह भी पता लगा है कि इससे पहले 25 मार्च को भी कसीनो खेला गया था। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के पांच अन्य होटलों और फार्महाउसों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जहां कसीनो चले। इनमें यही आरोपी शामिल थे या कोई और, यह जांच का विषय है। इनमें दिल्ली और गुरुग्राम के दो फाइव स्टार होटल के नाम भी पता लगे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही एक-दो और होटलों पर रेड मारे जाएंगे।
पुलिस ने बताया कि होटल के जिन दो प्रेजिडेंशियल सुइट में कसीनो चल रहा था, उन दोनों कमरों को कोरोना काल में 50-50 हजार रुपये में बुक कराया गया था। बुकिंग बर्थ-डे पार्टी के नाम पर की गई थी। लेकिन पुलिस का कहना है कि दोनों कमरों में खाने-पीने का काफी सामान मिला है। रूम के अंदर कसीनो वाली टेबल भी बरामद की गई है। ऐसे में, यह कैसे हो सकता है कि इन सबके बारे में होटल वालों को कोई भी जानकारी न हो। रूम में सर्विस देने वाला तो जाता ही होगा। इन सब मामलों की तहकीकात की जा रही है।
बता दें कि साउथ-वेस्ट जिले के स्पेशल स्टाफ ने होटल रेडिसन ब्लू में 28-29 मार्च की देर रात को छापा मारकर यहां के दो कमरों में चल रहे कसीनो का पर्दाफाश किया था। मामले में 14 आरोपी पकड़े गए थे। इनमें नेपाल की रहने वाली चार लड़कियां भी शामिल थीं, जिन्हें तीन-तीन हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से रखा गया था। मुलजिमों में एक कबाड़ी का काम करता है।