क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर लूटने वाले चार गिरफ्तार


नोएडा। क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर लोगों से लूटपाट करने वाले गिरोह का कोतवाली सेक्टर-39 पुलिस ने खुलासा कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लूटी हुई सोने की ज्वेलरी, 25 हजार रुपये और घटना में इस्तेमाल कार बरामद की गई है। आरोपी कई महीनों से महामाया फ्लाईओवर के आसपास वारदात दे रहे थे। पुलिस ने चारों बदमाशों को कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-24 पुलिस मंगलवार को गश्त कर रही थी, तभी गोल्फ कोर्स सेक्टर-37 के पास से चार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान त्रिलोकपुरी दिल्ली निवासी राहुल उर्फ अजय मिश्रा, रमेश, प्रवीण और अशोक उर्फ संटी के रूप में हुई। पुलिस ने इनके पास से सोने की दो अंगूठी, दो चेन व दो कंगन, 25 हजार रुपये और होंडा सिटी कार बरामद की है। आरोपी रात को होंडा सिटी में बैठकर दिल्ली से नोएडा आते थे और वाहन के इंतजार में खड़े लोगों को लिफ्ट देते थे। इसके बाद खुद को क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताकर मारपीट कर नकदी, ज्वेलरी आदि लूट लेते थे। बदमाश कभी क्राइम ब्रांच के अधिकारी तो कभी पुलिसकर्मी या कभी अन्य तरह के अधिकारी बनकर वारदात अंजाम देते थे। 26 फरवरी को बदरपुर दिल्ली निवासी कैलाश कांत को इन बदमाशों ने महामाया फ्लाईओवर के पास से लिफ्ट दी थी। कुछ दूर आगे जाने के बाद क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एटीएम कार्ड लूट लिया। बदमाशों ने उनसे पिन कोड पूछकर रुपये निकाल लिए थे। इस तरह इन बदमाशों ने सैकड़ों लोग से वारदात की बात स्वीकार की है। पुलिस इनके साथियों के बारे में पता कर रही है।
कई शहरों में की है घटनाएं
एडीसीपी ने बताया कि गिरोह पूरी तरह से संगठित है। आरोपी कई सालों से घटनाएं कर रहे हैं। आरोपियों ने बताया कि इन लोगों ने गौतमबुद्ध नगर के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर आदि शहरों में भी वारदात की हैं। पुलिस इनके आपराधिक इतिहास के बारे में पता लगा रही है। रमेश पर 4, राहुल पर सात, प्रवीण पर पांच और अशोक पर एक मुकदमा दर्ज है। गिरोह का सरगना राहुल है।
महामाया फ्लाईओवर के पास बदमाशों का सेफ जोन
गिरोह के बदमाशों ने नोएडा में अधिकतर लूटपाट की घटनाएं कोतवाली सेक्टर-39 क्षेत्र के महामाया फ्लाईओवर के आसपास और सेक्टर-37 के आसपास की है। आरोपियों ने पूछताछ में इस बात को स्वीकार भी किया है। पहले से भी महामाया फ्लाईओवर के आसपास इलाके को बदमाशों के लिए सेफ जोन माना जाता रहा है। यहां लगातार घटनाएं होने के बाद भी पुलिस अलर्ट मोड में नहीं दिखती है। जब कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारी जांच पड़ताल करते हैं तो थोड़ी देर के लिए इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था ठीक हो जाती है और बाद में फिर स्थिति जस की तस बनी रहती है।