ऑक्सीजन के लिए तड़पते मरीजों के लिए 'सांसें' लेकर पहुंचता है लखनऊ पुलिस का जवान


लखनऊ। राजधानी में बढ़ते कोरोना संक्रमण और उसकी चपेट में आए संक्रमितों के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के बीच राजधानी लखनऊ की कमिश्नरेट पुलिस के एक पुलिसकर्मी नितिन यादव ने संक्रमण से जूझ रहे मरीजों की देखभाल करने की जिम्मेदारी ली है। जिससे महामारी के बीच लखनऊ पुलिस का मानवीय चेहरा तो सामने आया है इसके साथ ही संक्रमण से लड़ रहे कई मरीजों के भीतर जिंदगी जीने की एक नई उम्मीद भी जगी है।
सोशल मीडिया पर मरीज ने की ऑक्सीजन सिलिंडर की मांग
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के पीआरओ मीडिया सेल नितिन यादव का कहना है कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का सोशल मीडिया पर रोजाना अनेकों मामले आते रहते हैं। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद बीते कुछ दिनों से ट्विटर पर लगातार लोग मदद की गुहार लगा रहे थे, इसी बीच एक व्यक्ति ने लखनऊ पुलिस को मेंशन करते हुए ऑक्सीजन सिलिंडरकी मांग की और मदद की गुहार लगाई।
पुलिस के वाहन से पहुंचाए ऑक्सीजन सिलिंडर
नितिन यादव ने बताया कि ट्वीट से संबंधित व्यक्ति से बात की गई तो पता चला कि पीजीआई क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल में 11 मरीज ऐसे हैं, जिनकी हालत बहुत नाजुक है। अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो जाने से उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। मामले को संज्ञान में लेते हुए अपने साथियों के सहयोग से ऑक्सीजन सिलिंडर का प्रबंध करके उस अस्पताल भिजवाया गया, जहां मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल के पास सिलिंडर लाने के लिए वाहन की व्यवस्था भी नहीं थी, जिसके बाद पुलिस विभाग के वाहन से ही ऑक्सीजन सिलिंडरों को अस्पताल तक पहुंचाया गया।
'निजी खर्च से होती है ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था'
कोरोना महामारी के बीच राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक दिक्कत ऑक्सीजन सिलिंडर की देखने को मिल रही है। ऐसे में कुछ लोगों को पैसे के बल पर ऑक्सीजन सिलिंडर मिलने में मदद मिल जाती है तो कुछ लोग जुगाड़ और ऊंची पहुंच के चलते अपना प्रबंध कर लेते हैं। लखनऊ कमिश्नरेट के पीआरओ मीडिया सेल नितिन का कहना है कि इन सबके बीच गरीब आदमी को मदद नहीं मिल पाती है, जिसके चलते वह लगातार व्यवस्थाओं से लड़ता रहता है। उन्होंने बताया कि बीते दिनों से ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए जो भी फोन कॉल्स या सोशल मीडिया पर उनके पास आए, उनमें से अधिकतर लोगों के पास ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदने या किराए पर लेने तक के पैसे नहीं थे। मरीजों को चंद पैसों के लिए अपनी जिंदगी से हाथ न धोना पड़े, इसके लिए उन्होंने अपने अपने साथियों के सहयोग और निजी खर्च के माध्यम से लोगों की मदद की।
'देर रात तक आते हैं मरीज के परिजनों के कॉल'
नितिन यादव का कहना है कि सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से अनेकों लोग रोजाना कॉल करते हैं। ऐसे में कार्यालय का काम संभालना भी मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के साथ अन्य पुलिसकर्मियों का इस काम में उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। उन्होंने बताया कि इस महामारी के दौर में लोगों को उचित इलाज मोहैया कराना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की टीम उन मरीजों को इलाज दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जो स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने में असमर्थ हैं।

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