वाराणसी को 'भिखारी मुक्त' बनाने का शुरू हुआ अभियान, नगर निगम का पूरा प्लान


वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अब सड़कों और घाटों पर भिखारी दिखाई नहीं देंगे। वाराणसी जिला प्रशासन ने इसे लेकर पूरा खाका तैयार कर लिया है। सोमवार से काशी को 'भिखारी मुक्त' बनाने के अभियान की शुरुआत भी कर दी गई है। शहर के दशाश्वमेध इलाके में भिखारियों की शिफ्टिंग का काम भी शुरू हो गया है। अभियान के पहले दिन सड़क और घाट किनारे बैठ भीख मांग रहे 13 लोगों को 'अपना घर' आश्रम भेजा गया।
फरवरी महीने में वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने शहर को भिखारी मुक्त करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम की टीम ने विभिन्न इलाकों का दौरा कर सड़क और घाटों पर बैठकर भीख मांगने वाले लोगों का डेटा तैयार किया था।
सभी के होंगे कोरोना टेस्ट
सोमवार से शुरू हुए इस अभियान के तहत सड़क किनारे और घाटों से शिफ्ट किए गए भिखारियों को 14 दिन 'अपना घर' आश्रम में आइसोलेट किया जाएगा। इसके अलावा सभी भिखारियों का कोरोना टेस्ट भी कराया जाएगा। इनमें से जो गम्भीर बीमारियों से पीड़ित हैं, उनके इलाज के लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
'खराब होती है काशी की छवि'
अपना आश्रम के संचालक डॉ. निरंजन ने बताया कि काशी में हर दिन हजारों पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सड़क, मंदिर और घाटों पर पैसे मांगने वाले भिखारी उनसे जबर्दस्ती पैसे मांगते हैं। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के नजर में काशी की खराब छवि सामने आती है। इसे ही दूर करने के प्रयास के तहत इस अभियान को चलाया जा रहा है।
मंदिरों और घाटों पर चलेगा अभियान
काशी के महत्वपूर्ण सड़को के अलावा प्रमुख घाट और मंदिरों के बाहर बैठकर भीख मांगने वाले भिखारियों को भी हटाया जाएगा। अभियान के अगले चरण में संकट मोचन, काल भैरव, बनकटी हनुमान मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों और घाटों पर यह अभियान चलेगा।
जबरन भीख मंगवाने वालों पर भी कार्रवाई
नगर निगम की टीम इन भिखारियों के अलावा घाटों और सार्वजनिक जगहों पर छोटे बच्चों और वृद्धों से जबरन भीख मंगवाने वालो पर भी कानूनी कार्रवाई करेगी।