कौशांबी में फर्जी काल सेंटर खोल नौकरी के नाम कर करोड़ों की ठगी


गाजियाबाद ब्यूरो। कौशांबी में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए साइबर सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी शाहदरा के अशोक नगर निवासी विकास कुमार व गांव निलोह थाना मवाना मेरठ निवासी पारस धामा हैं। साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि आरोपी क्विकर डॉट कॉम पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले लोगों का डाटा चोरी करते थे। इसके बाद उन्हें कॉल कर इंटरव्यू व अन्य प्रक्रिया के नाम पर खातों में रकम डलवाते थे। पुलिस का कहना है कि सरगना समेत चार आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि शातिर कौशांबी क्षेत्र में कॉल सेंटर चलाते थे। गिरोह के सदस्य क्विकर डॉट कॉम के जरिए नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करते थे। क्विकर डॉट कॉम पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले लोगों का डाटा चोरी करने के बाद आरोपी खुद को क्विकर का अधिकारी बनकर उन्हें कॉल करते थे। करीब 5 साल से आरोपियों ने ठगी का यह गोरखधंधा चलाया हुआ था। गिरोह के सदस्य अब तक सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी कर चुके हैं। आरोपियों के पास से करीब 800 लोगों के डाटा मिले हैं। साथ ही 8 बैंक खाते ट्रेस हुए हैं, जिन्हें सीज करा दिया गया है।
कॉलिंग के लिए फर्जी आईडी पर लेते थे सिम कार्ड
पुलिस के मुताबिक आरोपी फोन करने के लिए फर्जी आईडी पर सिम खरीदते थे। कई लोगों को ठगी का शिकार बनाने के बाद वह सिम तोड़कर फेंक देते थे। गिरफ्तार दोनों आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल, एक लैपटॉप, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, 6 रजिस्टर व बैंक के दो गारंटी पत्र मिले हैं।
सीओ कविनगर ने बताया कि विकास वर्ष 2018 में नोएडा सेक्टर-20 थाने से धोखाधड़ी के मामले में ही जेल जा चुका है। जेल से जमानत पर छूटने के बाद उसने ठगी का धंधा बदस्तूर जारी रखा। सीओ का कहना है कि सरगना की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही गिरोह की परतें खुलेंगीं। गिरोह में जो भी शामिल होगा, उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
दो से 25 हजार रुपये तक वसूलते थे रकम
सीओ ने बताया कि आरोपी खुद को क्विकर डॉट कॉम का अधिकारी बताकर बेरोजगारों को झांसे में लेते थे। उनसे इंटरव्यू, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस, कमीशन के अलावा रेल व हवाई जहाज के टिकट के नाम पर खातों में रकम ट्रांसफर कराते थे। नौकरी के पद के मुताबिक आरोपी दो हजार से 25 हजार रुपये तक खाते में डलवाते थे।