केन्द्र सरकार का पत्रकारों के साथ धोखा, अभी तक वैक्सीनेशन का आदेश नहीं


नई दिल्ली। कोरोना काल में पत्रकारों द्वारा आमजन को जागरूक किया गया साथ ही सामाजिक कार्यों को भी अंजाम दिया गया । कोरोना के पीक सीजन में पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी भी दी गई। किंतु अब जब वैक्सीनेशन की बारी आई तो तब पत्रकार न तो फ्रंट वर्कर रहा और ना ही सामाजिक कार्यकर्ता। पत्रकारों के साथ हो रहे इस अन्याय के लिए कौन जिम्मेदार है। कोरोना महामारी के खिलाफ लोगों को जागरूक करने व समाचार संकलन के लिए पत्रकार फ्रंट लाइन कोरोना वारियर की तरह कार्य कर रहे हैंं। ऐसे में पत्रकारिता और मीडिया जगत से जुड़े लोगों को भी वरीयता के साथ निशुल्क कोरोना वैक्सीन दी जानी है। कोरोना महामारी से निपटने के लिए विभिन्न मीडिया संस्थानों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 
कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान पत्रकारों को भी टीका लगाने की बात चल रही थी। पत्रकारों ने चिकित्सा कर्मचारियों व अन्य वारियर्स की ही तरह फील्ड में उतरकर कवरेज किया है। जबकि अभी तक कोरोना महामारी को खत्म करने का प्रयास जारी है। जिसके लिए मीडिया संस्थानों की भूमिका काफी विस्तृत है। महामारी के खिलाफ पत्रकारों ने लोगों के सही जानकारी पहुंचाई है। केन्द्र सरकार ने पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर बताकर बिना उम्र के वैक्सीनेशन की बात कही थी किंतु जब पत्रकार लोग वैक्सीनेशन करवाने गये तो बताया गया कि अभी केवल पैंतालीस वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को वैक्सीन लग रही है। फिलहाल अभी पत्रकारों को वैक्सीनेशन के संबंध में कोई भी जिओ जारी नहीं हुआ है और ना ही हमारा पोर्टल इसे एक्सेप्ट कर रहा है। पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है किंतु उनके साथ हो रहे इस अन्याय के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है। आखिर क्यों पत्रकारों का सरकार द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा है ।