शर्मनाक : गाजियाबाद में बेड न ऑक्सीजन, सड़क पर दम तोड़ रहे मरीज


गाजियाबाद ब्यूरो। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही इलाज के लिए लोगों की लाचारगी भी सामने आ रही है। अस्पतालों में आईसीयू बेड और ऑक्सीजन के लिए चक्कर काट रहे लोग इलाज के अभाव में सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। सुविधाओं का दावा करने वाले हुक्मरानों से एंबुलेंस की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही। बुधवार को पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सहित तीन जिंदगियां इस लापरवाही की भेंट चढ़ गईं। कुछ लोग अपने तीमारदारों को लेकर भटकते रहे और सिस्टम एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर लगवाता रहा।
केस-1
विधायक की रिश्तेदार को नहीं मिला बेड, मौत 
निवाड़ी की पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नीरज त्यागी पत्नी सुनील त्यागी की कोरोना से मौत हो गई। वह वर्तमान में गोविंदपुरम की गौड़ होम सोसायटी में रह रही थीं। नीरज त्यागी को इलाज के लिए बेड नहीं मिला। मुरादनगर से विधायक अजीत पाल त्यागी इनके रिश्तेदार हैं। विधायक अजीत पाल त्यागी का कहना है कि सुबह करीब 11 बजे नीरज त्यागी के परिवार से फोन आया था कि तबीयत बहुत खराब है और बेड नहीं मिल रहा है। उसके बाद काफी कोशिश की गई लेकिन बेड उपलब्ध नहीं हो सका। सुबह सांस लेने में तकलीफ होने पर नीरज को संजयनगर अस्पताल ले जाया गया, जहां यह कहकर लौटा दिया गया कि ये कोविड अस्पताल है, यहां सामान्य ओपीडी नहीं है। इसलिए मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाइए। इसके बाद परिजन यशोदा, अटलांटा अस्पताल पहुंचे, लेकिन बेड नहीं मिला।
केस-2
ऑक्सीजन न मिलने पर महिला ने तोड़ा दम 
जिला एमएमजी अस्पताल में सुनीता कक्कड़ (65) नाम की महिला की इलाज न मिलने से मौत हो गई। उनके दामाद संजीव चड्डा ने बताया कि वह दिल्ली से एंबुलेंस बुक करके सास को लेकर गाजियाबाद आए थे। दिल्ली में कहीं इलाज नहीं मिला। सबसे पहले वह संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल पहुंचे, जहां से उनको जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल भेज दिया गया। एमएमजी अस्पताल में सुनीता की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। संजीव चड्डा ने कहा कि कहीं भी कोरोना से इलाज की व्यवस्था नहीं है। खुद ही प्राइवेट एंबुलेंस बुक कर अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। सीएमएस डॉ. अनुराग भार्गव ने कहा कि महिला बहुत नाजुक हालत में अस्पताल लाई गई थी। जब तक ऑक्सीजन दी गई, महिला ने दम तोड़ दिया।
केस-3
एंबुलेंस में ही हो गई मौत 
जिला एमएमजी अस्पताल में पहुंचे अवंतिका निवासी अमरदीप ने बताया कि उनके 52 वर्षीय पड़ोसी की सोमवार को तबीयत खराब हुई। उनको सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उनके इलाज के लिए निजी अस्पतालों में बेड नहीं मिल सका। बुधवार सुबह वह बिस्तर से गिरे और शरीर कांपने लगा। कोविड कंट्रोल रूम पर एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन नहीं मिली। फिर किसी तरह एक एंबुलेंस की व्यवस्था करके एमएमजी अस्पताल के लिए चले लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल में चिकित्सकों ने बिना शव की जांच किए वापस कर दिया। साथ आए लोग शव को लेकर लौट गए। लोगों ने सरकारी इंतजाम न होने पर नाराजगी भी जाहिर की।
केस-4
गोद में संक्रमित बहन को लेकर बेड तलाशता रहा भाई 
बहन को इलाज दिलाने के लिए बुधवार को एक भाई सरकारी सिस्टम से संघर्ष करता दिखा। कृष्णानगर में रहने वाले राजू ने बताया कि चार दिन पहले बहन की कोरोना जांच कराई थी, बुधवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर कोविड कंट्रोल रूम में फोन किया, जहां से न इलाज मिला न एंबुलेंस। राजू ई-रिक्शा पर अपनी बहन को लेकर सुबह एमएमजी अस्पताल पहुंचा, जहां  कोरोना अस्पताल नहीं होने के चलते संतोष अस्पताल भेज दिया गया। संतोष हॉस्पिटल में ऑक्सीजन नहीं होने के कारण भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद संजयनगर संयुक्त अस्पताल में बहन को भर्ती कराया गया। राजू ने बताया कि परिवार में अन्य लोगों की जांच भी नहीं हो पाई है।
केस-5
उखड़ती सांसों को थामते पति को लेकर अस्पतालों में चक्कर काटती रही महिला  एमएमजी अस्पताल के बाहर ऑटो में एक महिला कोरोना संक्रमित पति को गोद में लिटाकर बैठी थी। पति की सांसे तेज चल रही थीं और हालत गंभीर थी। महिला का कहना था कि पति का ऑक्सीजन लेवल 80 के नीचे पहुंच गया है। सुबह एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद ऑटो से वह पहले संतोष अस्पताल पहुंचीं, जहां ऑक्सीजन नहीं होने से वापस भेज दिया गया। एमएमजी पहुंचने पर भी लाख गुजारिशों के बाद पति को कोविड अस्पताल न होने के चलते भर्ती नहीं किया गया। बाद में मायूस महिला ऑटो से दूसरे अस्पताल की तरफ रवाना हो गई। महिला का आरोप था कि एमएमजी अस्पताल में चिकित्सक बात सुनने तक नहीं आए।
कॉल पिक नहीं कर रहे जवाबदेह अधिकारी 
बुधवार को इन मामलों को लेकर जब सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता को कॉल किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।