वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद भी डॉक्टर और युवक को हुआ संक्रमण


  • एक डॉक्टर के साथ एक अन्य युवक को भी कोरोना वैक्सीन लेने के बाद भी हुआ संक्रमण
  • राजधानी के एक प्रमुख अस्पताल में हो रहा इलाज, स्थिति में सुधार   
दिल्ली ब्यूरो। केंद्र और राज्य सरकारें नागरिकों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन इन्हीं प्रयासों के बीच वैक्सीन लेने के बाद भी कुछ लोगों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की खबरें सामने आई हैं। ताजा मामले में राजधानी के एक डॉक्टर वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी कोरोना संक्रमित हो गए। उनका राजधानी के एक टॉप प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। इन डॉक्टर के आलावा एक अन्य युवक को भी वैक्सीन लगने के बाद संक्रमण हो गया है।
इस संक्रमित डॉक्टर का इलाज करने वाले डॉक्टर ने अमर उजाला को बताया कि पीड़ित ने लगभग एक महीने पहले कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली था। उन्होंने 30 दिन के अंतर के बाद इस विदेशी वैक्सीन की दूसरी डोज भी सफलतापूर्वक ली थी। वैक्सीन लेते वक्त डॉक्टर को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई थी।
लेकिन गत शनिवार को अचानक उन्हें बुखार हुआ और खांसी की शिकायत शुरू हो गई। कोरोना होने की आशंका में जब उन्होंने RT-PCR टेस्ट कराया तब पता चला कि उन्हें कोरोना संक्रमण हो गया है। इसके बाद से ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जहां उनका इस समय सफलतापूर्वक इलाज चल रहा है।
इन डॉक्टर का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया कि टेस्ट में यह बात सामने आई थी कि पीड़ित में उचित क्षमता की एंटी-बॉडी विकसित नहीं हो पाई थी, जिसके कारण उन्हें संक्रमण हो गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें यह संक्रमण कैसे हुआ, लेकिन इस मामले में अच्छी बात है कि पीड़ित का कोरोना माइल्ड प्रकृति का है जिसके लिए उचित उपचार किया जा रहा है।
मध्य दिल्ली के इसी अस्पताल में एक अन्य युवक को भी कोरोना की दोनों डोज लेने के बाद भी करोना संक्रमण हो गया है। युवक ने प्राथमिकता देते हुए पहले ही वैक्सीन लगवा ली थी, क्योंकि वे कोरोना वॉरियर की श्रेणी में आते हैं और इस कारण वैक्सीन लगवाने वालों की श्रेणी में आ गये थे। लेकिन कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी वे कोरोना संक्रमित हो गये। इनका संक्रमण भी माइल्ड कैटेगरी का पाया गया है जिसका इलाज चल रहा है।
युवाओं को ज्यादा चपेट में ले रहा कोरोना
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अभी तक का अनुभव बताता है कि इस लहर का कोरोना कम घातक है। इससे कम लोगों को अस्पतालों में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है और ज्यादातर का होम आइसोलेशन में ही इलाज चल रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इस बात के कोई लक्षण नहीं हैं कि कोरोना की यह लहर कम घातक है।
अब तक के मरीजों का अध्ययन यही बता रहा है कि इस लहर में युवा वर्ग ही कोरोना के आसान शिकार हो रहे हैं, जबकि प्रथम दौर में इसे बुजुर्गों और पहले से किसी अन्य बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए ज्यादा घातक बताया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक़ संक्रमण से बचने के लिए पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि इस बार संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है और यह आसानी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है।