गाजियाबाद के साहिबाबाद में इलाज ना मिलने के कारण पीड़ित ने अपने घर पर ही तोड़ दिया दम


दयाल शर्मा,(गाजियाबाद)। गाजियाबाद के साहिबाबाद में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहां परिवार के सामने ही उचित इलाज ना मिलने के कारण विनायक नागर निवासी लाजपत नगर साहिबाबाद गाजियाबाद अपने घर पर ही दम तोड़ दिया । वह पिछले 1 सप्ताह से कोरोना से पीड़ित थे अस्पताल में जगह ना मिलने के कारण घर में ही होम इसोलेट रहते हुए अपना उपचार कर रहे थे। आज दिनांक शुक्रवार 23 अप्रैल 2021 को सुबह 10:30 बजे उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। 
मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए  मृतक के परिजन 6 घंटे तक जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों से एंबुलेंस की गुहार लगाते रहे, मगर किसी भी अधिकारी के कान पर जू नही रेंगी, जो उनकी संवेदना को समझने का प्रयास कर सके।  जो कोइ अधिकारी उसकी पीड़ा को समझ तो गए मगर कानो में डाट लगा एम्बुलेंस उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे। जहां इस देश में पीड़ित को बैड नहीं मिल रहा और ना ही ऑक्सीजन सिलेंडर और न ही शमशान में मृतक व उनके परिजनों की लंबी कतार है। जहाँ मृतक के दाह संस्कार के लिए भी 8-8 घंटे की वेटिंग है, मैं उस भारत देश का नागरिक हूँ, मुझे गर्व है मेरा देश वास्तविकता में प्रगति की ओर है, जीवित को बेड और ऑक्सीजन नही, और मृतक को शमशान में जगह नही।

पीड़ित के स्वजनों ने, उनके पड़ोसियों ने एवं स्थानीय समाजसेवी हिमांशु शर्मा ने जिले के आला अधिकारियो डीएमओ जी के मिश्रा, नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर, कोविड-19  हेल्पडेस्क, महापौर आशा शर्मा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मयंक गोयल, विधायक प्रतिनिधि हरीचंद शर्मा, पुलिस के आला अधिकारियों, इत्यादि लोगों से निरंतर संपर्क किया। मगर जनप्रतिनिधियों की दरखास्त जिला प्रशासन ने नजरअंदाज कर दी। जहां मृतक के परिवार के सदस्य दाह-संस्कार के लिए इंतजार कर रहे थे, वही आस-पड़ोस के लोगों का सरकार में बैठे प्रशासन के अधिकारियों के प्रति गुस्सा बढ़ रहा था। वही आस पड़ोस में भय का माहौल था, क्योंकि मृतक के शरीर से दुर्गंध  फैल रही थी। वही आसपास के लोग कुछ समूह बनाकर एक दूसरे से सरकार और प्रशासन में बैठे आला अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त कर रहे थे।
स्थानीय लोगों की माने  तो उनका कहना था कि आसपास संक्रमण फैलने का खतरा क्योंकि मल्टी स्टोरी बिल्डिंग है और एक ही सीढ़ियों के माध्यम से 10-12 परिवारों का आवागमन है। 
जब इस बारे में  साहिबाबाद थानाध्यक्ष विष्णु कौशिक को पता लगा तो उन्होंने पीड़ित के परिजनों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एंबुलेंस दिलवाने सराहनीय कार्य किया। 
इसके बाद मृतक के शरीर को उसके घर से नीचे उतार कर एंबुलेंस में बैठाने का काम था।    5 युवाओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय देने का काम किया उनकी दूसरी मंजिल स्थित घर से नीचे उतारकर एंबुलेंस में रखा। और इन पांच युवकों में से एक मुस्लिम  भी था उनका नाम   सम्मी खान,  सुरेश कसाना अनिल कुमार सुशील चौधरी व पंडित हिमांशु शर्मा पूर्व पार्षद  प्रत्याशी वार्ड 75 अगर यह लोग ना पहुंचे तो शायद आज यह पार्थिव शरीर को उसके घर पर  ही पड़ा रहता हैं क्योंकि उनके घर में उनकी धर्मपत्नी एक ही बेटा है।
पंडित हिमांशु शर्मा का कहना है सरकार में बैठे प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि अगर किसी व्यक्ति की कोविड  के तहत अगर मृत्यु हो जाती है और उसके साथ कोई उसका परिजन ना हो तो ऐसे लोगों के लिए तत्काल प्रभाव से जिला प्रशासन के द्वारा उसका दाह संस्कार कराना चाहिए और एक समिति का गठन करना चाहिए जिससे उस परिवार को और वहां के अड़ोस पड़ोस को इस संक्रमण से बचाया जा सके और उसका दाह संस्कार जिला प्रशासन के खर्चे पर होना चाहिए मेरी संवेदना अगर सही लगे तो सरकार और प्रशासन में बैठे अधिकारियों  इस पर तत्काल निर्णय लें अन्यथा यह आपदा बहुत ही भयानक रूप लेने वाली है जिसके दोषी आप होंगे।