दुकान, मकान, पिता ने बेटी के लिए सबकुछ बेच दिया, हॉस्पिटल पहुंचे तो मिली मौत की खबर


दिल्ली ब्यूरो।  दिल्ली में शुक्रवार को जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सिजन की कमी से 20 मरीजों की मौत हो गई। कुछ मरीजों के परिजन ऑक्सिजन सिलेंडर लेकर भी पहुंचे थे। हालांकि, तब तक ऑक्सिजन का इंतजाम हो चुका था लेकिन शायद ऑक्सिजन बहुत देर से मिली थी। 

पैसे जमा कराने के बाद कहा, बेटी नहीं रही
हरि सिंह तोमर ने बताया कि उनकी बेटी 6 दिनों से इस अस्पताल में एडमिट थी। घर और दुकान बेचकर इस अस्पताल में बेटी का इलाज करवा रहा था। शुक्रवार 8 बजे विडियो कॉल पर बेटी से बात भी हुई। वह बिल्कुल ठीक थी। डॉक्टर ने खुद कहा था कि उनकी बेटी कोरोना से अच्छा रिकवर हो रही है। दो दिनों के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। शुक्रवार रात 9:55 पर अस्पताल में ऑक्सिजन खत्म होने की जानकारी मिली। रात 10:30 बजे कहा गया कि आप पैसे जमा कराएं। उसी वक्त 44,800 रुपये जमा करा दिए। रात 11:30 बजे कॉल आई कि उनकी बेटी की मौत हो चुकी है। यह बात बताते हुए हरि सिंह तोमर फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा कि बेटी की जान बचाने के लिए सबकुछ बेच दिया, लेकिन फिर भी अस्पताल ने बेटी की जान ले ली। बेटी 8 बजे तक बिल्कुल सही थी, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि मौत हो गई।


दो घंटे में ही कैसे हो गई मौत, जांच हो
इंदरपाल कटारिया ने बताया कि उनकी साली मंजू रानी पिछले 6 दिनों से अस्पताल में एडमिट थीं। शुक्रवार शाम तक वह बिल्कुल ठीक थीं। वह उनसे मिलने अस्पताल भी गए थे। उन्होंने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं, डिस्चार्ज करा दीजिए। इंदरपाल ने बताया, 'अस्पताल में एडमिट आसपास के मरीज भी कह रहे थे कि आपकी साली बिल्कुल ठीक है। सभी से अच्छे से बात भी कर रही है। शुक्रवार रात 8 बजे अस्पताल से घर के लिए निकला था, घर पहुंचने के बाद मेरी साली का विडियो कॉल भी आया और पूछा आपलोग सही से पहुंच गए। कुछ ही देर बाद अस्पताल से फोन आता है कि आपकी साली अब इस दुनिया में नहीं रहीं। अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर दो घंटे में ही मेरी साली की मौत कैसे हो गई। इस मौत की जांच होनी चाहिए।

अस्पताल से फोन आया, ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर आएं
नोएडा से पहुंचे सौरव सेठ ने कहा कि उनकी सास यहां एडमिट हैं। शुक्रवार रात अस्पताल से जानकारी मिली कि ऑक्सिजन की भारी कमी है मरीज के लिए ऑक्सिजन लेकर आएं। शुक्रवार रात से ही ऑक्सिजन के इंतजाम में जुटा रहा। शनिवार सुबह ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर पहुंचा, लेकिन अस्पताल ने ऑक्सिजन सिलिंडर नहीं लिया। ऑक्सिजन का इंतजाम हो चुका था। मेरी मरीज और डॉक्टर दोनों से बात हुई। फिलहाल मेरी सास ठीक हैं। इस अस्पताल में काफी मरीजों की मौत के बारे में सुनकर मन काफी विचलित हो रहा है। आखिर देश की राजधानी में कोई कैसे बिना ऑक्सिजन के दम तोड़ सकता है।

​पहले कहा-वेंटिलेटर की है जरूरत, फिर बताया नहीं रहे
मौत की खबर पर अस्पताल पहुंचे नरेंद्र कक्कड़ बताते हैं कि उनके दामाद के छोटे भाई अतुल कपूर एडमिट थे। अस्पताल से शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे कॉल आई कि आपके मरीज की मौत हो गई है। शुक्रवार शाम 5 बजे तक मरीज की स्थिति सही थी। रात 9 बजे कॉल आई कि उनको वेंटिलेटर की जरूरत है। फिर 10:30 बजे फोन आया कि मरीज की मौत हो चुकी है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर यह सब इतनी जल्दी कैसे हुआ। जब-जब अस्पताल ने जितने पैसे बोले हमने जमा कराया। कोई ऑक्सिजन खत्म होने की बात कह रहा है तो कोई मरीज की हालत गंभीर होने की बात कह रहा है। सरकार और दिल्ली पुलिस को इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की जरूरत है। दिल्ली में अब कोई ऑक्सिजन की कमी से न मरे सरकार को इस पर जल्द सोचना चाहिए।