अब ब्लैक फंगस की दवा अचानक गायब, कालाबाजारी शुरू, 12 हजार में एक इंजेक्शन


  • रेमडेसिविर, ऑक्सीजन के बाद अब अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन की शुरू हुई कालाबाजारी
  • सरकारी आंकड़ों में ब्लैक फंगस के मामले अब तक नहीं आए सामने
  • गुड़गांव, गाजियाबाद, नोएडा, पानीपत से भी मंगवा लिया इंजेक्शन
  • दिल्ली के कई अस्पतालों में ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती, तीन अस्पतालों में 100 से ज्यादा मामले
  • एक मरीज को 40 से 50 तक देने पड़ रहे हैं इंजेक्शन
दिल्ली ब्यूरो। कोरोना संक्रमित और रिकवर रोगियों में अचानक से बढ़े ब्लैक फंगस के मामलों ने एक बार फिर मुश्किलें पैदा कर दी हैं। राजधानी के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती इन मरीजों के लिए अम्फोटेरीसीन बी नामक इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है। एक इंजेक्शन की कीमत 12 हजार रुपये तक ली जा रही है, जिसकी वजह से इसकी कालाबाजारी भी पिछले तीन दिन में काफी बढ़ गई है। पहले रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी के बाद अब अम्फोटेरीसीन बी इंजेक्शन के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।दरअसल राजधानी के तीन अस्पताल एम्स, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और सर गंगाराम अस्पताल को मिलाकर 100 से ज्यादा मरीज उपचाराधीन हैं। सूत्रों से मिली शिकायत के बाद जब भागीरथी पैलेस, चांदनी चौक के अलावा बड़े दवा दुकानदारों के पास जाकर पड़ताल की गई तो पता चला कि वाकई में यह इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुका है। दुकानदारों ने कहा कि पिछले दो-तीन दिन में इस इंजेक्शन की कालाबाजारी काफी बढ़ गई है।
सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मनीष मुंजल ने बताया कि उनके यहां बीते शनिवार शाम तक 45 ब्लैक फंगस के रोगी भर्ती थे। जिन मरीजों को कोविड के साथ यह संक्रमण है उन्हें भर्ती कर लिया जा रहा है लेकिन नॉन कोविड मरीज के लिए न पर्याप्त बेड हैं और न ही इंजेक्शन। अपने मरीजों के लिए वे लगातार दवा के लिए संपर्क कर रहे हैं लेकिन कहीं भी यह इंजेक्शन उन्हें नहीं मिला। पड़ताल के दौरान पता चला कि कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले पहली बार सामने नहीं आए हैं। पिछले साल भी सबसे पहले सर गंगाराम अस्पताल ने ऐसे मरीजों का खुलासा किया था लेकिन उस दौरान राज्य व केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया। अगर उस समय सतर्कता बरतते हुए इस संक्रमण के बारे में जागरुकता और दवा उत्पादन पर काम किया जाता तो शायद अभी नए मामले और कालाबाजारी नहीं होती। 
डॉक्टरों के अनुसार ब्लैक फंगस से ग्रस्त मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगती है। अगर जल्द से जल्द उसे उपचार न मिले तो आंखों की रोशनी या फिर मस्तिष्क तक संक्रमण के पहुंचने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए एक मरीज को 40 से 50 तक इंजेक्शन की खुराक दी जाती हैं। आमतौर पर एक इंजेक्शन करीब छह से साढ़े छह हजार रुपये में मिलता है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि उनके यहां ब्लैक फंगस के 25 मरीज भर्ती हैं जिनमें से 20 कोरोना संक्रमित हैं। वहीं एम्स के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि ब्लैक फंगस की दवा उनके यहां भी सीमित मात्रा में ही मौजूद है। इस दवा को लेकर अभी तक सरकार ने भी वितरण इत्यादि को लेकर ध्यान नहीं दिया है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल के अलावा राजधानी के प्राइवेट अस्पतालों में भी ब्लैक फंगस के मरीजों को भर्ती किया है।
सरकार को तत्काल सख्ती की जरूरत
डॉक्टरों का कहना है कि ब्लैक फंगस के मरीजों को तत्काल दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इसकी कालाबाजारी रोकने और दवाओं को सीधे अस्पतालों में उपलब्ध कराने के लिए सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा पिछले दिनों की तरह फिर से राष्ट्रीय राजधानी में अव्यवस्था देखने को मिल सकती है। 
आपूर्ति कम, कालाबाजारी ज्यादा
इंडियन फॉर्मासिस्ट्स एसोसिएशन के महासचिव भूपेंद्र कुमार ने बताया कि दिल्ली एनसीआर के अलावा आसपास के राज्यों में भी यह इंजेक्शन गायब हो चुका है। आपूर्ति कम होने की वजह से इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है। कुछ दिन पहले तक गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव और पानीपत तक से मंगाया गया लेकिन अब यह दिल्ली में नहीं है। 
म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इंफेक्शन है जिसे ब्लैक फंगस के नाम से जानते हैं। यह शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन नाक, आंख, दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है। इस बीमारी में कई लोगों की आंखों की रोशनी तक चली जाती है, वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है।
देश में सबसे पहले कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस मिलने का खुलासा गंगाराम अस्पताल ने किया था। . साल 2020 में दिल्ली में 50 ब्लैक फंगस के मामले दर्ज किए गए।. एक से 15 मई के बीच दिल्ली में 250 से ज्यादा मामले आए सामने, दो सरकारी अस्पताल 30 मरीज . दिल्ली सरकार ने अब तक ब्लैक फंगस का सरकारी आंकड़ा नहीं किया सार्वजनिक
पिछले कुछ दिन में स्वस्थ्य हुए एक लाख से अधिक मरीज।. 62783 कोरोना सक्रिय मरीज, जिन्हें अनियंत्रित मधुमेह या स्टेरॉयड ले रहे हैं। . इनके अलावा दिल्ली में हर चौथा व्यक्ति मधुमेह का शिकार, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी।