पद्मविभूषण विजेता की बेटी का चेहरा दिखाने अस्पताल ने लिए थे 25 हजार!


वाराणसी। लाश का चेहरा दिखाने को 25 हजार, पीपीई किट के 1700 और इलाज के चार लाख रुपये...कोरोना की आपदा है, अवसर है। पंडित छन्नूलाल मिश्र वही जो पद्मविभूषण हैं, पद्मभूषण, यश भारती, संगीत शिरोमणि और एक जमाने के पीएम मोदी के प्रस्तावक भी। अभी जो आवाज सुनाई है वो आवाज है पंडित छन्नूलाल मिश्रा की बिटिया नम्रता की...वही जो बस इतना मांग रही है कि मेरी बहन जिस अस्पताल में भर्ती हुई, इलाज कराई और मर गई..प्लीज उनकी सीसीटीवी फुटेज दिलवा दीजिए। कोरोना से संक्रमित छन्नूलाल मिश्रा की बेटी संगीता का कुछ दिनों पहले वाराणसी के एक निजी अस्पताल में निधन हुआ था। छन्नूलाल मिश्रा के परिवार ने आरोप लगाया कि बिटिया का निधन चिकित्सकीय लापरवाही से हुआ और आरोप की शुरुआत उस हंगामे से हुई जो संगीता के देहांत के रोज अस्पताल में हुआ था।
पंडित छन्नूलाल मिश्र बेटी के गंभीर आरोप
एक पद्मविभूषण विजेता की बेटी के इलाज में लापरवाही की खबरों के साथ कई आरोप भी आए। आरोप लगा कि पहले दिन डेढ़ लाख जमा कराए गए और इलाज शुरू किया गया। लेकिन कुछ ही दिन में हालत बिगड़ती गई और फिर निधन हो गया। 7 रोज के इलाज के वक्त संगीता मिश्रा के साथ क्या हुआ...परिवार इसका जवाब मांग रहा है। सीसीटीवी की फुटेज मांग रहा है, इंसाफ मांग रहा है। डीएम के, सीएम के और पीएम के दरवाजे पर। लेकिन आरोप और भी हैं, नम्रता का आरोप है कि उनकी बहन के देहांत के बाद पीपीई किट में शव को बंद करने से पहले अस्पताल कर्मियों ने शव दिखाने के लिए 25 हजार रुपये लिए। आरोप है कि पीपीई किट का 1700 रुपया मांगा गया और 4 लाख रुपये का बिल अभी बाकी है जो अस्पताल आज भी मांग रहा ।
जांच समिति बोली- निर्दोष है अस्पताल
लेकिन डीएम के आदेश के बाद बनी जांच समिति का कहना है कि अस्पताल निर्दोष है। एकदम पाक साफ है, एकदम गंगा सा निर्मल। लेकिन जिस काशी के प्रतिनिधि बनकर छन्नूलाल सारी दुनिया में शिव विवाह, राम की कथा और कृष्ण की लीला सुनाते रहे,उसी काशी में आज वो बेबस होकर कह रहे हैं,जांच समिति ने सिर्फ अस्पताल की बात सुनी, हमें कुछ नहीं मिला।