बच्चा पैदा करके बेचता था गैंग,सूरत के हिसाब से होती थी कीमत


गाजियाबाद ब्यूरो। गाजियाबाद के डाबर तालाब कॉलोनी में एक नवजात शिशु के चोरी होने की बात सामने आई थी। अब इस मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चे के पैरेंट्स ने ही गोद देने के बहाने बेचा था, लेकिन जिस शख्स को बच्चा दिया गया था, उसने पैसे नहीं दिए तो चोरी का केस दर्ज करा दिया गया।
कोतवाली प्रभारी ओपी सिंह ने बताया कि बच्चे के पैरंट्स ने इस बात को स्वीकार किया है। पुलिस बच्चे की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। पुलिस ने मामले में 6 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में पता चला कि पैरंट्स के अलावा कई रिश्तेदार ग्रुप बनाकर रहते हैं। इनके द्वारा भी अपने बच्चों को गोद देने के बहाने सौदेबाजी कर बेचे गए हैं। पुलिस सभी कड़ियों को जोड़ जांच कर रही है।
14 दिन के बच्चा चोरी की दर्ज की थी शिकायत
बता दें कि बुधवार को डाबर तालाब में रहने वाले फरियाद और उसकी पत्नी रोशनी ने 14 दिन के बच्चे की चोरी की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम पर दी थी। बताया कि 2 अज्ञात लोग बच्चे को चोरी कर ले गए हैं। एसएचओ ओपी सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया था।
पूछताछ में पता चला कि पीड़ित के घर पर एक दंपती बुधवार दोपहर में आए थे। करीब ढाई घंटे बाद दोनों 2 काले रंग के बैग लेकर घर से निकले थे। पुलिस ने शक होने पर कई लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में फरियाद ने कबूल किया कि उसने अपने बच्चे को एक रिश्तेदार के माध्यम से किसी को गोद दिया था, लेकिन इसके बदले में मिलने वाले पैसे नहीं पहुंचे तो चोरी का मुकदमा दर्ज कराया।
कई रिश्तेदार भी शामिल
पुलिस के मुताबिक, फरियाद के करीब 6-7 रिश्तेदार आसपास रहते हैं। इनका कॉलोनियों में मांगकर खाने का धंधा है। किसी भी जगह एक डेढ साल से अधिक नहीं रहते। इसी दंपती ने 3 साल पहले अपने बेटे को करीब एक लाख रुपये में गोद देने के नाम पर बेचा था। पूछताछ के लिए हिरासत में लि गए रिश्तेदारों ने सभी की पोल खोल दी। कई लोग बच्चों को गोद देने के नाम पर खरीद फरोख्त में लिप्त पाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि उनकी जांच अभी जारी है।
एक रिश्तेदार करता था डील
पुलिस के मुताबिक, आरोपी दंपति से पूछताछ में पता चला कि उनका एक रिश्तेदार ग्राहकों से दिल्ली एनसीआर में डील करता है। पुलिस ने कथित रिश्तेदार को भी हिरासत में लिया है। पूछताछ में उसने बताया कि बच्चे की शक्ल सूरत के हिसाब से सौदा तय किया जाता था।