सट्टेबाजीः थाने में पेश नहीं हुआ दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन का चपरासी


दिल्ली ब्यूरो। राजधानी के अरुण जेटली स्टेडियम में एक्रीडिटेशन कार्ड बनाकर घुसे दो सट्टेबाजों को लेकर दिल्ली पुलिस की जांच फिलहाल दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन (DDCA) के एक चपरासी पर आकर रुक गई है। वह अभी तक गायब है। उसे पुलिस की तरफ से गुरुवार को थाने में आने का नोटिस दिया गया था, लेकिन वह तफ्तीश में शामिल नहीं हुआ। डीडीसीए की तरफ से भी चपरासी को जल्द रिपोर्ट करने का नोटिस भेजा गया है। पुलिस की एक टीम गिरफ्तार मनीष कंसल (38) और कृष्ण गर्ग (26) के ठिकानों को खंगाल रही है।
मनीष और कृष्ण को सेंट्रल डिस्ट्रक्ट के स्पेशल स्टाफ ने 2 मई को गिरफ्तार किया था। दोनों की 5 दिन की रिमांड शुक्रवार को खत्म हो रही है। पुलिस अदालत से रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है। जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की चर्चा भी है, लेकिन हाईप्रोफाइल मामला होने से पुलिस के आला अफसर चुप्पी साधे हैं। पुलिस दोतरफा जांच कर रही है। एक, इस सिंडिकेट में डीडीसीए के कौन लोग शामिल हैं। दूसरा, दोनों गिरफ्तार सट्टेबाजों के तार किन बुकियों से जुड़े हैं। दो मोबाइल छोड़ फरार हुए शख्स की तलाश भी जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, आउटसोर्स हाउसकीपिंग कंपनी के सुपरवाइजर प्रमोद कुमार ने साफ कहा कि पकड़े गए और भागे हुए शख्स का उनकी कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके कार्ड डायरेक्ट डीडीसीए की तरफ से बने हैं। साउथ एमसीडी के हेल्थ डिपार्टमेंट के खाते से बने कार्ड में चपरासी बालम सिंह की भूमिका सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि बालम ही इस लिस्ट को लेकर आया था, जिसमें कृष्ण गर्ग का नाम जोड़ा गया। बालम 28 अप्रैल से बगैर बताए ड्यूटी से गायब है। उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।
दिल्ली पुलिस ने बालम को गुरुवार सुबह 10:30 बजे आईपी एस्टेट थाने में हाजिर होने को कहा था, लेकिन वह नहीं आया। डीडीसीए के प्रशासक नीरज शर्मा ने भी नोटिस भेज गुरुवार को कोटला या थाने में रिपोर्ट करने का नोटिस दिया था। नोटिस में कहा गया है कि ऑफिस में उपलब्ध फोन नंबर पर लगातार संपर्क किया जा रहा है। वॉट्सएप मेसेज भी भेजे गए हैं, लेकिन जवाब नहीं आया। छुट्टी भी अप्लाई नहीं की है। कहां हैं इसकी जानकारी भी नहीं दी है।
इंटरनल जांच की उठी मांग
सूत्रों का कहना है कि एक डायरेक्टर के करीबी बालम से पूछताछ के बाद साफ हो पाएगा कि डीडीसीए के भीतर के कौन लोग एक्रीडिटेशन कार्ड के गड़बड़झाले में शामिल हैं। डीडीसीए से रेकॉर्ड मिलने के बाद साफ हो सकेगा कि तीन के अलावा कोई अन्य एक्रीडिटेशन कार्ड तो अवैध तरीके से नहीं बनवाया गया था। डीडीसीए के मेंबरों की तरफ से भी प्रेजिडेंट रोहन जेटली से इस मामले की इंटरनल जांच कराने की मांग उठ रही है। मेंबरों का मानना है कि इस कांड में सिर्फ चपरासी या कर्मचारी नहीं बल्कि कुछ 'बड़े लोग' भी शामिल हो सकते हैं।