फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज से भारत सरकार को पहुंचाया करोड़ों का नुकसान, तीन गिरफ्तार


नोएडा ब्यूरो। सेक्टर-62 के आइथम टावर में चल रहे एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने बुधवार को खुलासा किया है। इससे इंटरनेशनल वॉइस कॉल को निजी सर्वर में लैंड कराकर कॉलिंग कराई जा रही थी। इससे भारत सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से भारी मात्रा में सीपीयू, मॉनिटर से लेकर अन्य तकनीकी सामान बरामद किया गया है। इस पूरे नेटवर्क को मुंबई में बैठकर चलाने वाला मास्टरमाइंड फिलहाल फरार है। गिरफ्तार आरोपियों से आंतरिक सुरक्षा को लेकर आईबी की टीम पूछताछ कर रही है।
नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस को टाटा टेलीकॉम सर्विसेज की तरफ से एक शिकायत मिली थी। इसके बाद कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस की टीम टाटा टेलीकॉम के नोडल अधिकारी अनिल शर्मा और दूरसंचार विभाग के अधिकारी अभिषेक शुक्ला के साथ मंगलवार दोपहर को आईथम टावर में दबिश दी। इसमें पता चला कि यहां इबाद सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कॉल सेंटर चल रहा है। जब यहां जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि यहां फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चल रहा है। मौके से मुख्य आरोपी मुरादाबाद निवासी ओवेस आलम, गाजियाबाद निवासी पुष्पेंद्र कुमार और विजय नगर निवासी पवन कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। ओवेस स्थानीय स्तर पर गिरोह का सरगना है। वह मुंबई में बैठे मोहसिन के लिए काम करता है। पुलिस पूछताछ में पता चला है कि यह लोग नवंबर 2020 से काम कर रहे थे।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी ओवेस आलम सेक्टर-62 में ऑफिस खोलकर फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा था। यहां पर इन लोगों का पूरा सेटअप तैयार था, लेकिन यहां कोई व्यक्ति नहीं बैठता था। पूरा सिस्टम रिमोट के आधार पर चलता था और ओवेस मुरादाबाद में बैठकर अन्य साथियों के माध्यम से इस सिस्टम को चलाता था। जांच में पता चला है कि आरोपी टाटा टेलीकॉम से कनेक्शन लेकर गेटवे के माध्यम से सर्वर में कनेक्ट कर इंटरनेट से कंट्रोल करते थे। इसके बाद इंटरनेशनल कॉलिंग को इंडिया में गेटवे के माध्यम से लैंड करवाते थे। इसमें विदेश की लोकेशन शो नहीं होती, थी लेकिन टाटा टेलीकॉम का नंबर नोएडा एसटीडी कोड से दिख रहा था। आलम ने मुरादाबाद स्थित घर पर पूरा सेटअप लगा रखा था। वहीं से ही वह नोएडा में रखे गए सर्वर को कंट्रोल कर रहा था।
खाड़ी देशों से आने वाले कॉल को कर रहे थे डायवर्ट
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी खाड़ी देशों यानी सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत, ओमान बहरीन आदि से आने वाली कॉल को डायवर्ट कराकर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों के लोगों को कॉलिंग करा रहे थे। खाड़ी देशों में रहने वाले लोग परिजनों से कम पैसे में बात कर रहे थे और आरोपियों ने दूरसंचार विभाग और भारत सरकार से अलग एक अपनी लाइन बना ली थी जिसका कुछ भी पैसा नहीं लगता था। इससे विदेश से कॉल करने वाले लोगों को कम पैसे में बात हो जाती थी। ऐसे में गिरफ्तार आरोपियों को जितना भी पैसा मिलता था वह पूरा लाभांश ही था।
भारत सरकार को हर महीने 25 लाख का नुकसान
टाटा टेलीकॉम सर्विसेज के अधिकारियों ने बताया कि इस फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज से कंपनी को नुकसान तो हो ही रहा था। साथ ही, भारत सरकार को हर महीने करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हो रहा था। आरोपी बिना भारत सरकार के परमिशन और बिना जानकारी के ही सर्वर और अन्य तकनीकी माध्यमों से अलग टेलीकॉम लाइन चला रहे थे। इससे लोगों को तो लगता था कि यह नोएडा के नंबर से एक्सचेंज होकर उनके पास कॉल आ रही है, लेकिन ऐसा नहीं था। आतंकी गतिविधि में शामिल लोग भी इन नंबरों और इस टेलीकॉम लाइन का इस्तेमाल कर सकते थे। हालांकि, किसी आतंकी गतिविधि और देश की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसी आईबी की टीम आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
आरोपियों के नाम
- ओवेस आलम: एक्सचेंज नेटवर्क का स्थानीय मास्टरमाइंड और मुरादाबाद का रहने वाला है। एमएससी और आईटी पास।
- पुष्पेंद्र कुमार: सेक्टर-62 के आइथम ऑफ टावर में चलने वाले ऑफिस का इंचार्ज।
- पवन कुमार: विजय नगर गाजियाबाद का रहने वाला है और सेक्टर-80 स्थित जिओ कंपनी में काम करता है और यही सिम कार्ड पुष्पेंद्र को उपलब्ध कराता था।
सेक्टर-63 में भी चल रहा था ऑफिस, एक हिरासत में
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सेक्टर-63 के ए 37 में भी एक कंपनी है जहां से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का काम हो रहा है। जब कोतवाली सेक्टर- 58 पुलिस ने इसकी सूचना दी तो कोतवाली फेज-3 पुलिस ने दबिश देकर इस गिरोह के एक अन्य आरोपी अमूल्य को भी हिरासत में लिया है। यहां बहुत बड़ा सेटअप नहीं था, लेकिन आरोपियों ने ऑफिस बना रखा था।
बरामदगी : एक कार, करीब 12 हजार रुपये, 14 छोटी बैटरी, पांच सर्वर, एक सिम बॉक्स, लैपटॉप, 80 सीपीयू, 54 मॉनिटर, 87 की-बोर्ड, 107 माउस, 158 पावर केबल, 11 मुहर, 12 हार्ड डिस्क, 32 सिग्नल एंटीना, 26 नेटवर्किंग केबल, एक आईफोन, 25 विजिटिंग कार्ड, 24 सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, आरसी, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि।

पुलिस ने एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी सर्वर से अंतरराष्ट्रीय वॉइस कॉल को भारतीय नंबर पर ट्रांसफर करवाकर भारत सरकार को राजस्व का काफी नुकसान करा रहे थे और इससे देश की सुरक्षा को भी खतरा था। - रणविजय सिंहए एडीसीपी नोएडा