कोरोना संक्रमित डॉक्टर को अपने ही अस्‍पताल में नहीं मिला बेड, ड्यूटी रूम में शुरू किया गया इलाज


दिल्ली ब्यूरो। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में जहां एक तरफ आम आदमी को इलाज के जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वहीं कोरोना पेशंट्स की देखरेख में लगे डॉक्टरों को भी कोरोना संक्रमित होने पर बेहतर इलाज और अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहा है। ऐसी ही कहानी है दिल्‍ली के सत्यवादी राजा हरीशचंद्र हॉस्पिटल में सीनियर रेज़िडेंट डॉक्‍टर अमित गुप्ता की।
गुप्ता के परिवारवालों ने बताया कि वह पिछले एक साल से कोरोना मरीजों को बचाने में दिन रात लगे हुए थे। लोगों की जान बचाते-बचाते यह कोरोना वॉरियर खुद भी कोरोना की चपेट में आ गए। त्रासदी देखिए कि जिस सत्यवादी राजा हरीशचंद्र हॉस्पिटल (कोरोना अस्‍पताल) में कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्‍टर अमित गुप्‍ता दिन-रात काम रहे थे, उसी अस्‍पताल में कोई बेड खाली नहीं था, मजबूरी में उन्‍हीं के साथी डॉक्‍टर्स ने अस्‍पताल प्रशासन के सहयोग से डॉक्‍टर्स ड्यूटी रूम में उनका इलाज शुरू किया।
अस्पतालों के लगाने पड़े चक्कर
अब इलाज तो शुरू हो गया, लेकिन डॉक्‍टर अमित गुप्‍ता की हालत बिगड़ती जा रही थी। डॉक्‍टर्स ड्यूटी रूम में अमित गुप्‍ता का दो दिन तक इलाज चला मगर सुधार नहीं हुआ। हालत बिगड़ती देख परिवारवालों ने जैसे-तैसे डॉक्‍टर अमित गुप्‍ता को दिल्ली के श्री अग्रसेन इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट किया, लेकिन यहां भी कोई सुधार नजर नहीं आया। रेमडेसिविर से लेकर टोसालिज़ूमैब इंजेक्शन तक का इंतज़ाम करने में परिवार को तारे नज़र आ गए। खैर, किसी तरह दवाओं का इंतज़ाम हुआ, लेकिन ये दवाएं दिए जाने के बावजूद डॉक्‍टर अमित गुप्ता की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।
परिवारवालों को डॉक्टरों से यही पता चलता रहा कि उन्हें कोविड के साथ निमोनिया हो गया है। बड़ी जद्दोजहद के बाद परिवार ने उन्हें 11 मई की देर रात मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट कराया। डॉक्‍टर गुप्‍ता का इलाज अब यहीं पर चल रहा है और वह आर्टिफिशियल मिकेनिकल वेंटिलेशन पर हैं और वो इन्ट्यूबेटेड हैं। डॉक्‍टर अमित गुप्‍ता की जिंदगी से जंग जारी है।
कोरोना पेशंटस के इलाज के दौरान हुए कोरोना से संक्रमित
डॉक्‍टर गुप्ता को ड्यूटी पर रहने के दौरान ही कोरोना संक्रमण हुआ था। उन्‍हें 19 अप्रैल को पहली बार कोरोना के लक्षण महसूस हुए, जिसके बाद उन्‍होंने कोरोना टेस्‍ट कराया, रिपोर्ट दो दिन बाद आई और उसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद चार-पांच दिन तक डॉक्‍टर गुप्‍ता घर पर ही होम आइसोलेशन में रहे। जब हालत बिगड़ी तो पहले उन्‍हें सत्यवादी राजा हरीशचंद्र हॉस्पिटल ले जाया, जिसके बाद श्री अग्रसेन इंटरनेशनल अस्पताल और यहां भी सुधार नहीं हुआ तो उन्‍हें मेदांता एडमिट कराया गया।
दिल्ली सरकार ने नहीं की मदद
डॉक्‍टर अमित गुप्ता के परिवारवालों ने बताया कि अमित पूरे एक साल से कोरोना मरीजों की जान बचा रहे है और उसे अपने ही अस्‍पताल में जरूरी दवाइयां नहीं मिल पाई। पूरा परिवार दवाइयों के लिए भटकता रहा, लेकिन कोराना वॉरियर डॉक्‍टर के परिवार को दिल्‍ली सरकार से मदद तो छोड़ो, सांत्‍वना या हिम्‍मत बढ़ाने वाला एक फोन तक नहीं आया।
सहकर्मियों का मिला पूरा साथ
इस पूरे संघर्ष के दौरान डॉक्‍टर अमित गुप्‍ता को सत्यवादी राजा हरीशचंद्र हॉस्पिटल के अपने साथी डॉक्‍टर्स और हॉस्पिटल एडमिनिस्‍ट्रेशन का भरपूर सहयोग मिला, लेकिन वे चाहकर भी अपनी साथी के लिए जरूरी दवाएं उपलब्‍ध नहीं करा सके, क्‍योंकि ये वही दौर था जब अस्‍पतालों में ऑक्‍सीजन और रेमिडिसिवर जैसी दवाओं का क्राइसेस चल रहा था। खैर, संसाधनों की कमी पर तो इंसान का बस नहीं, लेकिन इस कोरोना वॉरियर के परिवार का दर्द ये है कि दिल्‍ली सरकार ने अपने कोरोना वॉरियर की सुध तक नहीं ली। किसी ने ये नहीं पूछा कि इलाज ठीक से हो रहा है या नहीं? क्‍या कोई मदद की जरूरत है या नहीं?