दिल्ली पुलिस के एएसआई ने कायम की मिसाल,अंतिम संस्कार कर रहा दिल्ली पुलिस का एएसआई


  • जब अपने भी छोड़ दे रहे साथ, तो अंतिम संस्कार कर रहा दिल्ली पुलिस का यह एएसआई
  • इंसानियत निभाने के लिए एएसआई ने अपनी बेटी की शादी भी टाल दी
  • एएसआई राकेश कुमार अबतक करा चुके 1100 से ज्यादा अंतिम संस्कार
दिल्ली ब्यूरो। जब कोरोना के डर से अपने भी साथ छोड़ रहे हैं। तब दिल्ली पुलिस का एक एएसआई कोरोना से जान गंवाने वालों को न सिर्फ कंधा दे रहा, बल्कि अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। इन दिनों श्मशान में ऐसे कितने ही शव ऐसे आ रहे हैं, जिनके साथ एक या दो ही परिजन होते हैं। कई बार वे भी डरकर श्मशान घाट के बाहर ही बैठ जाते हैं। ऐसे में यह एएसआई इन शवों का अंतिम संस्कार कराने में जुटे हैं। 56 साल के एएसआई राकेश कुमार साउथ-ईस्ट दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन थाने में तैनात हैं। 1986 बैच के राकेश मूलरूप से बड़ौत, यूपी के रहने वाले हैं। आजकल लोदी रोड श्मशान घाट में आने वाले कोरोना मृतकों के शवों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं। 13 अप्रैल से यहीं डटे हैं।
बेटी की शादी भी टाल दी
अपने इस काम को डयूटी से भी अधिक अपना धर्म समझते हुए एएसआई ने अपनी बेटी की शादी भी कुछ समय के लिए टाल दी है। इनका कहना है कि बेटी की शादी तो बाद में भी हो जाएगी, लेकिन अभी जरूरत यहां इंसानियत निभाने की है। उनके इस फैसले से परिवार के तमाम लोग रजामंद हैं। एएसआई से जब पूछा कि क्या तुम्हें डर नहीं लगता? जवाब था नहीं, डर किस बात का। किसी को तो यह काम करना ही है। अगर हर आदमी ऐसे ही मुंह मोड़ लेगा, तो यह सिस्टम कैसे चलेगा? इंसानियत का फर्ज तो निभाना ही चाहिए। वह वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके हैं। हर वक्त मास्क और ग्लव्स पहनकर इस काम में जुट रहते हैं।
हर कोई कर रहा सलाम
एएसआई राकेश कुमार के इस साहस भरे इस काम को न केवल यहां शवों के साथ आने वाले परिजन रोते-बिलखते हुए सलाम करते हैं, बल्कि पूरी जिला पुलिस उन्हें सेल्यूट कर रही है। जिले के डीसीपी आर पी मीणा भी उनकी सराहना करते हैं।
करा चुके 1100 से ज्यादा अंतिम संस्कार
राकेश बताते हैं कि वह यहां कोरोना की दूसरी लहर के शुरू होने के साथ यानी 13 अप्रैल से लगे हैं। अब तक वह इस श्मशान घाट में 1100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। इनमें करीब 60 शव तो ऐसे थे। जिनके एक या दो ही परिजन साथ में थे। वह भी डर से श्मशान घाट के अंदर नहीं आए। शवों को कंधा तक उन्होंने दिया। एक मामले में तो सिंगापुर से एक शख्स ने रिक्वेस्ट की कि दिल्ली में उसकी बुजुर्ग मां की कोरोना से मौत हो गई है। प्लीज उनका अंतिम संस्कार करा दीजिए। एएसआई ने उस बुजुर्ग महिला के शव का अंतिम संस्कार खुद कराया। इस तरह के कितने ही मामले हैं, जिनमें मृतक का परिवार आगे नहीं आया और एएसआई ने उनका अंतिम संस्कार कराया।