हाईकोर्ट ने जारी किया हाईकोर्ट के ही रजिस्ट्रार जनरल और विधि विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस


  • राजस्थान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
  • कोरोना वायरस मामले की सुनवाई से जुड़े मामले को सुना
  • जनहित याचिका की सुनवाई के बाद जारी किया नोटिस
जोधपुर,(राजस्थान)। अदालती कार्यवाही को लाइव देखना हर नागरिक का अधिकार है और विशेष रूप से वे सभी याचिकाएं जो कोरोना वायरस से संबंधित हैं। इस मांग को लेकर अधिवक्ता अर्पित गुप्ता द्वारा एक जनहित याचिका हाईकोर्ट के पेश की गई। जिस पर सोमवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल व विधि विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले में आगामी दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी। वहीं इस मामले में सभी पक्षों को कोर्ट को जुड़ी समस्त जानकारी देंगे। सभी पक्षों से आने वाली जानकारी के बाद कोर्ट की ओर से सभी पहलूओं को ध्यान में रखते हुए आगे की सुनवाई की जाएगी।
मामले में याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से यह निर्देश देने की मांग की है कि राजस्थान राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर चर्चा करने वाली याचिकाएं और राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण सार्वजनिक महत्व के विषय हैं । नागरिकों का यह अधिकार है कि वे अदालतें और लाइव सुनवाई में भाग लें। याचिकाकर्ता ने बताया कि कोरोना काल से पहले सुनवाई के समय भी हर अदालत ने जनता के देखने के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं। याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की है कि सभी हितधारकों को शामिल करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाना चाहिए , जो राज्य की जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा। मामले को अब दो सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए लिया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय भी माना इसे सही
यह ध्यान रखना प्रासंगिक है कि स्वप्निल त्रिपाठी बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग से जानकारी जानने और प्राप्त करने के अधिकार में मदद मिलती है, जो कि अनुच्छेद 19 के तहत एक मौलिक अधिकार है।