इस साल भी फीकी रही ईद, कोरोना महामारी के कारण बंद रहे मस्जिदें


जकार्ता (इंडोनेशिया)। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे वर्ष ईद-उल-फितर जोर शोर से नहीं मना सके। महामारी के कारण मस्जिदें बंद रहीं और इस उत्सव को मनाने के लिए परिवार के लोग एकजुट नहीं हो पाए। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में सड़कों पर लोग सामूहिक नमाज के लिए एकत्रित हुए, उन्होंने मास्क पहन रखे थे। कम जोखिम वाले इलाकों में मस्जिदों में नमाज की अनुमति दी गई लेकिन अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में मस्जिदें बंद रहीं। दक्षिणपूर्वी एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद, जकार्ता स्थित इस्तिकला ग्रांड मस्जिद भी ईद पर बंद रही। इंडोनेशिया तथा मलेशिया में ईद पर लगातार दूसरे साल लोगों को अपने संबंधियों के घर जाने के लिए यात्रा करने की इजाजत नहीं थी।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने टेलीविजन पर संबोधन में कहा, ‘‘ऐसे समय पर हमें अपने रिश्तेदारों की कमी खलती है, खासकर ईद के मौके पर। लेकिन अपने घरों को नहीं जाकर और एकजुट होकर हमें सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।’’ पिछले वर्ष भी ईद के मौके पर इसी तरह की पाबंदियां थीं बावजूद इसके ईद की छुट्टी के तीन हफ्ते बाद इंडोनेशिया में संक्रमण के दैनिक मामले 37 फीसदी तक बढ़ गए थे। जकार्ता के गर्वनर ने मॉल, रेस्त्रां आदि को बंद करने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री बुडी गुनाडी सादिकीन ने चिंता जताई है कि यात्रा पर प्रतिबंध के बावजूद लोग आना जाना करेंगे और वायरस के मामले बढ़ सकते हैं। दक्षिण फिलीपीन में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते और सरकारी बलों तथा मुस्लिम चरमपंथियों के बीच संघर्ष के कारण बड़े पैमाने पर सार्वजनिक तौर पर नमाज अता करने की इजाजत नहीं दी गई है। मलेशिया में प्रधानमंत्री मुहिद्दीन यासिन ने एकाएक ही एक और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी जो बुधवार से शुरू होकर सात जून तक चलेगा। अंतरराज्यीय यात्रा और सभी सामाजिक गतिविधियों पर भी रोक है।