मथुरा में 103 साल के योगीराज, भुजा चना और खिचड़ी है आहार, एक बार में ही करते हैं 84 आसन


मथुरा। तकरीबन 70 साल पहले अयोध्या छोड़कर बृजधाम आए महंत रामआसरे दास महाराज कई लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। बृजभूमि में पहले उन्होंने वृंदावन में ठाकुर जी की शरण में आकर आराधना शुरू की, इसके बाद वह गोवर्धन आकर निवास करने लगे। इस योगीराज ने अपना संपूर्ण जीवन योग साधना को समर्पित कर दिया। आज उनकी अवस्था 103 वर्ष की है लेकिन इसके बावजूद जब वह विभिन्न योगासन करते हैं तो उन्हें देख लोग दंग रह जाते हैं।
बिना रुके योग के 84 आसन करते हैं रामआसरे दास महाराज
उम्र 103 साल और योग के 84 आसन। यह सुनने या जानने में भले ही अविश्वसनीय-सा लगे लेकिन सच है। योगीराज स्वामी रामआसरे जी महाराज जब योग करना शुरू करते हैं तो बिना रुके 84 आसन कर जाते हैं। अपने नित्य नियम के अनुसार योग के ताड़ासन, अर्धचक्रासन, गरुणासन तथा पद्मासन बहुत उत्साह और सफाई के साथ करते हैं। चक्रासन में वह जब अपने दोनों हाथों और पैरों को जमीन पर रखकर तेजी से घूमते हैं तो देखने वाले अपलक उन्हें देखते ही रह जाते हैं। अपने हाथों की 3 उंगलियों पर पूरे शरीर का वजन रखकर उनका मयूरासन भी सभी को आश्चर्य में डाल देता है।
भुने चने और खिचड़ी ही है नियमित आहार
यह योग का ही कमाल है कि 103 साल के स्वामी रामआसरे दास महाराज की शारीरिक चपलता युवाओं को भी पीछे छोड़ती है। हालांकि, भोजन के मामले में वह बहुत संतुलित हैं। रामआसरे दास महाराज अपनी खुराक के रूप में मात्र कुछ भुने हुए चने और खिचड़ी खाकर ही उदर पूर्ति कर लेते हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को जीने के लिए खाना चाहिए ना कि खाने के लिए जीना चाहिए।
संकटहरण योगाश्रम से देश विदेश में होता है योग का प्रसार
योगिराज स्वामी रामआसरे दास महाराज का संकटहरण योगाश्रम गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में पूंछरी और जतीपुरा के मध्य सुरम्य वातावरण में स्थित है। यह आश्रम देश-विदेश में योग साधना के संवाहक केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। महंत रामआसरे दास महाराज के कई शिष्य इस आश्रम में आकर योग की शिक्षा ग्रहण करते हैं। अपने शिष्यों को निशुल्क शिक्षा देने वाले रामआसरे दास महाराज का कहना है कि भारतीय संस्कृति में योग को उच्च दर्जा प्राप्त है। वह कहते हैं कि सरकार को स्कूल कॉलेजों में योग की कक्षाएं भी अनिवार्य करनी चाहिए।