आगरा में चल रहा भिक्षावृत्ति का 'बिजनस', भीख मांगने के लिए किराये पर मिलते हैं बच्चे, संस्था ने छुड़ाए 114 मासूम


आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में भिक्षावृत्ति (भीख मांगने) का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। चाइल्डलाइन और महफूज (सुरक्षित बचपन) संस्था की ओर से किए गए दो रेस्क्यू ऑपरेशन में 114 बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। भिखारियों की संख्या में महिलाओं के साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इन बच्चों की उम्र 6 से 12 साल के बीच रहती है। भीख मांगने के लिए बच्चों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ताजनगरी के एमजी रोड और ऐतिहासिक स्थलों पर भिखारियों का जमावड़ा रहता है।
बच्चे अदल-बदल कर लाते हैं भिखारी
महिलाओं और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले महफूज सुरक्षित बचपन संस्था के कॉर्डिनेटर नरेश पारस ने बताया कि उन्होंने साल 2020 के नवंबर और दिसंबर माह में शहर के एमजी रोड पर सर्वे किया था। एमजी रोड पर कई ऐसी महिलाओं को भीख मांगते हुए देखा लेकिन ये महिलाएं अपने साथ जो बच्चे लेकर आतीं थीं वो अगले दिन बदल जाता था। पूछताछ करने पर महिलाएं भाग जाती थीं।
वहीं आसपास के दुकानदारों ने उन्हें बताया कि ये महिलाएं रोजाना बच्चे अदल-बदल कर लाती हैं। इन्हें बच्चे किराए पर मिलते हैं। उन्होंने बताया कि एमजी रोड साईं की तकिया पर उन्हें एक महिला मिली थी, जिसके पास 10 बच्चे थे। इनकी उम्र 6 से 12 साल के बीच थी। पूछने पर वह इन बच्चों को अपना बता रही थी, लेकिन जब उस महिला से बच्चों की उम्र पूछी गई तो हड़बड़ा गई।
किराए पर मिलती हैं थालियां
सोमवार को शंकर भगवान, मंगलवार को हनुमान जी, शनिवार को तेल में शनिदेव की तस्वीर लगाकर ये बच्चे शहर के व्यस्तम चौराहों पर भीख मांगते हैं। बच्चों को भीख मांगने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। हर दिन के हिसाब से इनकी थालियों में भगवान की तस्वीर बदल जाती है। दुकानदार बताते हैं कि बच्चे किराए पर थालियां लेकर जाते हैं और भीख में आए पैसों से किराया अदा करते हैं। थालियों का एक दिन का किराया 15 से 20 रुपया होता है लेकिन थालियां कहां से लाते हैं इसकी जानकारी बच्चे नहीं देते हैं। ज्यादा पूछने पर ये भाग जाते हैं।
चाइल्डलाइन की को-ऑर्डिनेटर ऋतु वर्मा ने बताया कि जुलाई 2020 में एसपी सिटी रोहन प्रमोद बोत्रे के साथ ऑपरेशन आसरा चलाया था जो कि अक्टूबर तक चला। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 69 बच्चे रेस्क्यू किए गए थे, जिनमें 22 बच्चे आगरा के रहने वाले थे बाकी अन्य राज्यों के थे। जिन्हें उनके अभिभावकों की सुपर्दगी में सौंपा गया। इस ऑपरेशन में कई एनजीओ और सीडब्ल्यूपीओ (चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर) भी शामिल रहे। ऋतु वर्मा का कहना है कि रेस्क्यू के दौरान कई ऐसे बच्चे मिले थे जिनके नाम से पुलिस थानों में मिसिंग कंप्लेन दर्ज थीं।
भीख के कारोबार में लिप्त है संगठित गिरोह
समाजसेवी नरेश पारस ने भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि बच्चों को महिलाएं अपनी गोद में लेकर मुख्य चौराहों और मंदिर पर दिखाई देती हैं जबकि इन बच्चों की शक्ल महिलाओं से भी मेल नहीं खाती है। इस बात की भी आशंका है कि यहां बच्चों को तस्करी करके लाया जाता है और भिक्षावृत्ति करवाई जाती है। उन्होंने एसएसपी से मांग की है कि आगरा में भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए खुफिया एजेंसियों से काम करवाया जाए।