हाथरस केसः पीएफआई के 4 सदस्यों को दोषी साबित नहीं कर पाई पुलिस, एसडीएम ने दिए जेल से रिहाई के आदेश


  • हाथरस केस में गिरफ्तार पीएफआई के 4 सदस्यों को रिहा करने के आदेश
  • 8 महीने बाद भी आरोपियों को शांतिभंग का दोषी साबित नहीं कर पाई पुलिस
  • हिंसा भड़काने की साजिश के तहत 5 अक्टूबर 2021 को किया गया था अरेस्ट
मथुरा। उत्तर प्रदेश के हाथरस के बूलगढ़ी में युवती की रेप के बाद हत्या के मामले के तूल पकड़ने के बाद थाना मांट पुलिस ने यमुना एक्सप्रेस-वे से इस घटना की आड़ में हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में पीएफआई के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को उपजिला मैजिस्ट्रेट मांट ने आरोपियों को शांतिभंग के आरोपों से बरी करने का आदेश पारित किया है।
पुलिस नहीं कर पाई शांति भंग करने का दोषी साबित
हाथरस कांड के बाद 5 अक्टूबर 2020 को यमुना एक्सप्रेस-वे पर 4 आरोपियों अतीकुर्रहमान, आलम, सिद्दीकी और मसूद अहमद को अरेस्ट किया था। इन पर हाथरस कांड की आड़ में हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे। मांट पुलिस ने इनका शांतिभंग में चालान कर जेल भेज दिया था। बाद में मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई और इनका कनेक्शन पीएफआई और सीएफआई से होने की बात भी सामने आई। एसटीएफ की जांच में कुछ और नाम भी सामने आए तो उन्हें भी आरोपी बनाया गया।
कुछ महीने पहले ही एसटीएफ ने मथुरा कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ 5 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं मांट पुलिस की ओर से पहले से पकड़े गए चारों आरोपियों के खिलाफ शांति भंग करने के आरोप के साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाने के मामले में मंगलवार को उपजिला मैजिस्ट्रेस्ट रामदत्त राम ने शांतिभंग के आरोप में चारों आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा से बरी किए जाने के आदेश पारित कर दिया।
पीएफआई के सदस्यों के वकील मधुमंगल दत्त चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि 5 अक्टूबर 2020 को मांट टोल प्लाजा से पुलिस ने चारों लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सभी पर हिंसा फैलाने और शांति भंग करने के आरोप में एसडीएम मांट के समक्ष पेश किया था। 8 महीने बाद पुलिस कोई भी साक्ष्य पेश नहीं कर पाई तो एसडीएम मांट ने चारों के ऊपर लगे आरोपों को गलत ठहराते हुए पुलिस अभिरक्षा से मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं।