बावरिया गैंग के 8 बदमाश दबोचे, 5 जिलों में 30 वारदात, खेतों में रखवाली के बहाने आते थे चोर


  • अंतरराज्यीय नकबजनी व चोर गिरोह का पर्दाफाश
  • चोर गिरोह के 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार
  • आरोपियों ने करीब 30 वारदात करना कबूली
  • मन्दिर, दुकान, मकान व ट्रांसफार्मर चोरी की वारदातों को अंजाम देती थी गैंग
  • बसवा थाना क्षेत्र में गैंग ने की तीन वारदातों
दौसा,(राजस्थान)। जहां चोर लगातार वारदात को अंजाम देने के लिए नई-नई तरकीब ढूढ़ रहे है। वहीं पुलिस भी उनके इरादों को नाकाम करने में जुटी है। ताजा मामला दौसा जिले का है। यहां दौसा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय नकबजनी और चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिनके कब्जे से वारदातों में काम में ली जाने वाली बोलेरो गाड़ी व चार मोटरसाइकिल भी बरामद की हैं। उल्लेखनीय है कि इन आरोपियों ने अब तक करीब 30 वारदातें करना कबूल की है।
मकानों, मंदिरों और दुकानों में चोरी
दौसा एसपी अनिल बेनीवाल ने प्रेस वार्ता करके बताया कि यह गैंग मकानों, मंदिरों, दुकानों में चोरी करने के साथ-साथ ट्रांसफार्मर चोरी की वारदातों को अंजाम देती थी। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी जगह-जगह अपना नाम व पता बदलकर और अपनी पहचान छिपाकर रहते थे। साथ ही उसके बाद वारदात को अंजाम देकर दूसरी जगह चले जाते थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही से ट्रांसफार्मर चोरी का तांबा भी बरामद किया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी दौसा, अलवर, जयपुर , करौली भरतपुर आदि क्षेत्रों में वारदातों को अंजाम देते थे। फिलहाल दौसा पुलिस सभी आठ आरोपियों से पूछताछ कर रही है , ताकि अन्य वारदातों का खुलासा हो सके। इस बड़ी कार्रवाई में सीआई नरेश कुमार शर्मा और एसआई अजीत बड़सरा व दारासिंह की टीम का विशेष योगदान रहा है।
पुलिस ने भीप सिंह उर्फ रघुवीर उर्फ लच्छू निवासी रजवास निवाई, विजय उर्फ पुंडा, सुखराम उर्फ सतराम, रामकेश उर्फ गज्जू, सरदार उर्फ जागा, चरण, सोनू उर्फ गोल्या, चेतराम सभी बावरिया हाल निवासी वेदांत आश्रम के पास लिलोज को गिरफ्तार किया गया है।
वारदात करने का तरीका
यह सभी आरोपी बावरिया जाति के हैं और चोरी करना बावरिया गैंग का व्यवसाय बन गया है। ये चोरी करके ही अपनी रोजी-रोटी की व्यवस्था करते हैं। गिरफ्तार हुए सभी लोग गांव में खेतों की रखवाली के बहाने आते हैं। कुछ दिन तक खेत के मालिक का दिल जीतने का काम करते हैं, फिर आसपास के क्षेत्र में चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए सूने मकान दुकानों व मंदिरों में रहकर करते हैं । साथ ही मौका मिलने को चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। इस दौरान यदि कोई आ जाए या इन बदमाशों को चोरी करते हुए देख ले तो वह गीलोल से हमला करते हैं और देखने वालों को चोटिल करके फरार हो जाते हैं।

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