मेक इन इंडिया के नाम पर कारोबारियों से करोड़ों की ठगी


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा मंत्रालय के प्रतिष्ठानों से बिजनेस दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी सामने आई है। ग्रेटर कैलाश की एक कंपनी पर आरोप है कि उसने देश के कई राज्यों के फैक्ट्री मालिकों को करोड़ों की कमाई का सब्जबाग दिखाया। डिफेंस मिनिस्ट्री में उनकी फैक्ट्री को रजिस्टर्ड कराने का झांसा देकर पैसे वसूले गए। भरोसा जीतने के लिए पोस्ट डेटेड चेक भी दिए, जो बाद में बाउंस हो गए। खुद को ठगा महसूस कर रहे कारोबारियों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई। आर्थिक अपराध शाखा ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भूषण ओहरी (49) परिवार समेत ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया में उनकी फैक्ट्री है। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने कहा कि नवंबर 2019 के पहले हफ्ते में उनके पास ग्रेटर नोएडा स्थित कंपनी मैग्नीटेक इंजीनियर्स की इग्जेक्यूटिव शिल्पा शाह का कॉल आया। उसने बताया कि उनकी कंपनी पीएम मोदी की स्कीम मेक इन इंडिया के तहत भारत सरकार की डिफेंस मिनिस्ट्री के विभिन्न प्रतिष्ठानों में करोड़ों रुपये के जरूरी सामान की सप्लाई का ऑर्डर दिलवा सकती है। जानकारी लेने और चर्चा करने के लिए ग्रेटर कैलाश स्थित अपने ऑफिस में बुलाया।
वह नवंबर 2019 के दूसरे हफ्ते में कंपनी के ऑफिस गए। वहां दूसरे इग्जेक्यूटिव कर्ष करनवाल से मिलाया गया। इसने एक दमदार प्रजंटेशन पेश करते हुए बताया कि उनकी कंपनी को विभिन्न डिफेंस डिपार्टमेंट में रजिस्टर्ड करा देंगे, जिनमें कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट , डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, इंडियन नेवी और इंडियन एयरफोर्स शामिल होंगे। पीएम मोदी की मेन इन इंडिया स्कीम के तहत इनसे उनकी कंपनी को बिजनेस मिलेगा। नवंबर 2019 के तीसरे हफ्ते मैग्नीटेक इंजीनियर्स के मुखिया केवीके मूर्ति और शिल्पा उनकी फैक्ट्री देखने आए।
करोड़ों की कमाई का झांसा देकर उनसे फैक्ट्री रजिस्टर्ड कराने के लिए 4.84 लाख रुपये मांगे गए। ओहरी को ऑफिस बुलाया गया, जहां उन्हें मूर्ति ने अपनी कंपनी की वेबसाइट दिखाई और प्रजंटेशन दी। इससे प्रभावित होकर दिसंबर 2019 में उन्होंने मूर्ति के साथ एग्रीमेंट किया। उन्होंने चेक भी दे दिए। मूर्ति ने काम नहीं होने पर पैसा वापस देने के लिए उन्हें दो पोस्ट डेटेड चेक सौंपे। समय बीतने के बाद जब काम नहीं हुआ तो ओहरी ने पूछताछ की। मूर्ति बहानेबाजी करने लगा। लिहाजा उन्होंने मूर्ति के दिए चेक 10 मई 2020 को बैंक में लगा दिए, जो बाउंस हो गए।
3.27 करोड़ की ठगी का खुलासा
सोशल मीडिया के जरिए पीड़ित को पता चला कि ऐसा झांसा देकर देश भर कई कारोबारियों से ठगी हुई है। ईओडब्ल्यू की शुरुआती जांच में अब तक देश भर के कुल 21 फैक्ट्री मालिक सामने आए हैं, जिनसे 3 करोड़ 12 लाख 27 हजार रुपये की ठगी हुई है। इनमें हैदराबाद की एसएसआर इंटरप्राइजेज से सबसे ज्यादा 2 करोड़ 20 लाख रुपये ऐंठे गए। इनके अलावा यूपी, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और मुंबई के कारोबारी शामिल हैं। इनसे 2 से लेकर 10 लाख रुपये तक ठगे गए। पुलिस को जांच के दौरान कई और पीड़ित कंपनियों के सामने आने की उम्मीद है।