गाजियाबाद के एसएसपी अमित कुमार पाठक ने बुजुर्ग की दाढ़ी काटने के मामले मेें किया खुलासा, जांच में नहीं मिला धार्मिक एंगल


सूर्य प्रकाश,(गाजियाबाद)। गाजियाबाद के लोनी में एक बुजुर्ग को बंधक बनाकर तीन घंटे तक पिटाई करने और उसकी दाढ़ी काटने के मामले में पुलिस ने स्पष्टीकरण दिया है कि उनकी जांच में घटना का कोई धार्मिक एंगल नहीं मिला। ताबीज को लेकर आक्रोश के चलते आरोपियों  ने ये घटना की।
गाजियाबाद के एसएसपी अमित कुमार पाठक ने मामले के बारे मेें खुलासा करते हुए कहा कि मारपीट में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया गया है, बाकी लोगों के लिए हमारी टीमें प्रयास कर रही हैं।
एसएसपी पाठक ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर जो कंटेट प्रकाशित किया गया वो गैर-जिम्मेदाराना है। जिन लोगों ने जानबूझकर सोशल मीडिया पर अलग एंगल देने के लिए इसको छापा उसमें 7 लोगों, ट्विटर और ट्विटर इंडिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
एसएसपी के बयान के बाद सामने आया एडीजी का बयान
इस मामले में यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में प्रभाव रखने वाले लोगों ने बिना किसी फैक्ट चेक के वीडियो ट्वीट किए। गाजियाबाद पुलिस को जांच में पता चला कि यह घटना पांच जून की है। आरोपी और पीड़ित दोनों एक दूसरे को जानते थे और यह आपसी रंजिश का मामला है।
एडीजी प्रशांत ने आगे बताया कि, अब्दुल समद सैफी जो ताबीज बनाने का काम करता है उसने आरोपी परवेश को भी ताबीज बेचा था। जब ताबीज से कोई फल नहीं मिला तो आरोपियों ने बुजुर्ग की पिटाई कर दी। 14 जून को मामले में केस दर्ज किया गया और दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। एक की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी थी।
एडीजी ने बताया कि 15 जून को पुलिस ने स्पष्टीकरण दे दिया था कि यह आपसी रंजिश का मामला है। मामले में लिप्त दोनों पक्ष हिंदू और मुस्लिम थे। इसके बाद भी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसरों ने अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया जिससे प्रदेश में सांप्रदायिक एकता को नुकसान पहुंचा। ट्विटर ने भी सांप्रदायिक ट्वीट्स को डिलीट करने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया। उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।