बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के बैंक अकाउंट में सेंध लगाने वाले दो जालसाज गिरफ्तार


नई दिल्ली। यूपी के उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के बैंक अकाउंट में सेंध लगाकर फर्जी चेक्स के जरिए 97,500 रुपए निकाल चुके दो जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान पटना के निहाल सिन्हा उर्फ सुमित और बिहार के सारण जिले के रहने वाले उसके बॉस दिनेश राय के रूप में हुई, जो चीटिंग का एक पूरा संगठित गिरोह चला रहे थे। ये लोग फर्जी चेक के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाले थे। इनके पास से पुलिस ने कुछ सिम कार्ड्स, डेबिट कार्ड्स, फर्जी चेक और कुछ अन्य संदिग्ध चीजें बरामद की हैं।
पुलिस के मुताबिक, सांसद साक्षी महाराज ने संसद मार्ग थाने में एक एफआईआर दर्ज कराते हुए पुलिस को बताया था कि किसी ने तीन फर्जी चेक के जरिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उनके अकाउंट से 97,500 रुपए निकाल लिए हैं, जबकि ओरिजनल चेक उन्हीं के पास हैं। जिन चेक के जरिए यह रकम निकाली गई थी, उन चेक के नंबर भी उन्होंने पुलिस को मुहैया कराए, जिसके आधार पर संसद मार्ग थाने में केस दर्ज करके पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। बैंक में जाकर पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपियों ने सांसद के खाते से पैसे निकालने के लिए तीन फर्जी चेक दिए थे। रकम पहले सांसद के खाते से एक अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर हुई और फिर वहां से यूपीआई के जरिए तीन अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में पैसे डाले गए। इस रकम को बाद में पटना में एटीएम के जरिए निकाला गया। इस पूरी कड़ी में एक कॉमन मोबाइल नंबर भी पुलिस के हाथ लगा, जिसकी मदद से पुलिस ने पटना से पहले निहाल सिंह को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर उसके बॉस दिनेश राय को भी धर दबोचा। बाद में पुलिस दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लेकर आई।
पूछताछ में पता चला कि निहाल को दिनेश राय फर्जी चेक देता था। वह इन चेकों को विभिन्न बैंकों में जमा करवा के पैसे ट्रांसफर करता था। इस काम के लिए उसे ठगी की कुल रकम का 30 फीसदी कमिशन के रूप में मिलता था। दिनेश राय ने पुलिस को बताया है कि वह पहले फर्जी चेक छपवाता था और फिर उन्हें निहाल की मदद से बैंकों में जमा करवा के पैसे निकलवाता था। बैंक और पुलिस की नजरों में आने से बचने के लिए ये लोग आमतौर पर 50 हजार रुपए से कम रकम का ही चेक लगाते थे, क्योंकि इससे ज्यादा रकम होने पर बैंक के अकाउंट होल्डर के पास तुरंत सूचना चली जाती थी, लेकिन कम रकम का चेक होने की वजह से इनके फर्जीवाड़े के बारे में बैंक के अधिकारियों और अकाउंट होल्डर्स को तुरंत कुछ पता नहीं चल पाता था और जब तक किसी को कुछ पता चलता था, तब तक ये लोग अपना काम कर चुके होते थे।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह पूरे देश में ठगी की वारदातें करता था। पुलिस को इसमें कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत होने का भी शक है, क्योंकि पीड़ित का चेक नंबर, खाता नंबर और उसके हस्ताक्षर कैसे हैं, यह इन्हें बैंक कर्मचारियों के जरिए ही पता चलता था। यही वजह है कि अब कई बैंक कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस आरोपियों से भी इस बारे में पूछताछ कर रही है।